बिहार चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद मोदी की ललकार, बोले- बंगाल से होगा जंगलराज का अंत
बिहार में भाजपा के प्रतिनिधित्व वाले एनडीए गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली भाजपा मुख्यालय में पहुंचे और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस मौके पर पीएम मोदी "बिहार में हमने जंगलराज को समाप्त किया" और अब "बंगाल से होगा जंगलराज का अंत" जैसा संदेश चाहते हैं।
बता दें बिहार के बाद अब 2026 में पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाला है, पीएम मोदी ने बिहार चुनाव की जीत में ये हुंकार भर ये संदेश दे दिया है कि भाजपा का अगला मिशन पश्चिम बंगाल है। पीएम मोदी ने ये बयान देकर ये साफ कर दिया कि अगर हमने (एनडीए) बिहार में कर दिखाया, तो बंगाल में भी कर सकते हैं"। जंगलराज जैसे शब्द का प्रयोग कर पीएम मोदी ने सीधे त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) के बंगाल शासन-समय निशाना साधा है।

अब बंगाल से जंगलराज खत्म करने का वादा
भाजपा की रणनीति बिहार में अपनाई गई "जंगलराज" थीम से मिलती-जुलती है। बिहार में पिछली सरकारों की कानून-व्यवस्था विफलताओं को उजागर करके उन्होंने मतदाताओं को आकर्षित किया था। बिहार में '90-'00 के दशक के उस समय को "जंगलराज" कहा था।
पीएम मोदी ने कहा था बिहार जंगलराज 100 साल नहीं भूलेंगे। मोदी-गठबंधन इसे एक सफल विरोधी फ्रेम के रूप में इस्तेमाल कर चुका है। जनता को पीएम मोदी ने आगाह कर दिया था कि अगर एनडीए को जनता नहीं चुनती है तो लालू की पार्टी के राज में पहले की तरह फिर जंगलराज आ जाएगा।
अब उसी फ्रेम को बंगाल में पीएम मोदी फिट करने की मुहिम आज से छेड़ दी है। अब पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह के संदेश का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें विपक्षी शासन और राज्य सरकार पर विकास में पिछड़ने और अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है
भाजपा लगातार ये मुद्दा उठाता रहा है
याद रहे भाजपा के शीर्ष नेता पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और विरोधियों पर उत्पीड़न जैसे मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित किया जा रहा है। पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल में "जंगलराज" और "गुंडाराज" होने का दावा किया, साथ ही "शासन की अनुपस्थिति" की शिकायत भी की।
बंगाल में बढ़ा अपराध, विकास में पिछड़ा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल को कभी "भारतीय पुनरुत्थान का पालना" कहा जाता था। हालांकि, कुछ भाजपा नेताओं का मानना है कि अब राज्य "पीछे चल रहा है"। उनका तर्क है कि राज्य में "विकास नहीं हुआ है, अपराध बढ़ा है और महिलाओं की सुरक्षा स्थिति बिगड़ गई है।" ऐसे में वहां की जनता भी अब बेहतर विकल्प चाहती है।
बिहार के बाद बंगाल में भी शुरू हो चुका है SIR
गौरतलब है कि बिहार के बाद भारत के चुनाव आयोग ने कई राज्यों वोटर लिस्ट की गहन जांच के लिए एसआईआर प्रक्रिया शुरू कर दी है इसके सर्वे के जरिए मतदाता-सूची को २००२ के आखिरी SIR के बाद से बड़ी मात्रा में अपडेट किया जाएगा। इसके तहत बूथ-स्तर अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर मतदाता फार्म बांटेंगे, फॉर्म भरे जाएंगे, दस्तावेजों की जांच होगी, पुराने २००२ सूची से मिलान होगा। इस सर्वे से उम्मीद है कि जितने घुसपैठिए बंगाल में वोटर हैं जो ममता दीदी के वोटर कहलाते हैं उनको वोटर लिस्ट से बाहर निकाला जाएगा। बिहार चुनाव में एसआई का असर देखने को मिला है। इसी तरह बंगाल में भी फर्जी वोटर के हटने से चुनाव परिणामों में ममता को तगड़ा झटका लग सकता है।












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