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दलितों का दिल और वोट जीतने के लिए बीजेपी ने चले ये तीन अचूक अस्त्र

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    नई दिल्‍ली। 2019 लोकसभा चुनाव को ध्‍यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एक साथ तीन अचूक अस्‍त्र चले हैं। पहला- एससी-एसटी एक्ट को यथावत रख लोकसभा में विधेयक पेश किया। केंद्र सरकार सोमवार तक बिल पास करा लेना चाहती है। दूसरा- बसपा संस्‍थापक, दलित नेता और मायावती गुरु कांशीराम को भारत रत्‍न देने की तैयारी और तीसरा- सुप्रीम कोर्ट में एससी-एसटी कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में 22.5 फीसदी आरक्षण की पुरजोर वकालत। मोदी सरकार ने क्‍यों उठाए ये तीन बड़े कदम और क्‍यों इन्‍हें कहा जा रहा है अचूक अस्‍त्र आइए चर्चा करते हैं।

    एससी-एसटी एक्‍ट को मायावती बनाना चाहती हैं 2019 का ट्रंप कार्ड, पर बीजेपी ने विधेयक पेश कर बिगाड़ा खेल

    एससी-एसटी एक्‍ट को मायावती बनाना चाहती हैं 2019 का ट्रंप कार्ड, पर बीजेपी ने विधेयक पेश कर बिगाड़ा खेल

    2019 लोकसभा चुनाव में मुकाबला कांग्रेस बनाम बीजेपी नहीं बल्कि मायावती बनाम नरेंद्र मोदी होगा। दलित-पिछड़े जिधर जाएंगे सरकार उसी की बनेगी। मायावती की कोशिश है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बीजेपी पर मढ़ दिया जाए, लेकिन बीजेपी ने एससी-एसटी संशोधन विधेयक को दलितों की मांग के अनुरूप लोकसभा में पेश कर बड़ा दांव चल दिया है। यह जल्‍द से जल्‍द पास भी करा लिया जाए। 21 मार्च 2018 सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों ने 'भारत बंद' का ऐलान किया। 2 अप्रैल को हिंसक आंदोलन में कई लोगों की मौत हुई। दलितों ने कोर्ट के फैसले का गुस्‍सा मोदी सरकार पर उतारा। दलित संगठनों ने मोदी सरकार को एक बार फिर आंदोलन का अल्टीमेटम दे रखा है। तारीख निर्धारित की गई है 9 अगस्त 2018। मांग है- एससी एसटी एक्ट को पुराने स्वरूप में वापस लाने की। नौबत यहां तक आ गई कि एनडीए के ही घटक दल बीजेपी पर दबाव बनाने लगे।

    परसेप्‍शन के गेम में फंसी बीजेपी यूं तोड़ेगी बसपा का चक्रव्‍यूह

    परसेप्‍शन के गेम में फंसी बीजेपी यूं तोड़ेगी बसपा का चक्रव्‍यूह

    बीजेपी को बरसों से ब्राह्मण और बनिया वोटरों की पार्टी माना जाता रहा है। 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के राष्‍ट्रीय पटल पर आने के बाद यह स्थिति बदली और यूपी से लेकर महाराष्‍ट्र तक दलितों की राजनीति करने वाले मोदी लहर बर्बाद हो गए। बीजेपी पर दलितों ने भरोसा किया, लेकिन एससी-एसटी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दलितों पर भीड़ की हमलों ने दलितों को उग्र कर दिया। विपक्ष बीजेपी पर दलित विरोधी और आरक्षण विरोधी होने का आरोप मढ़ रहा है। परसेप्‍शन के इस गेम में फंसी बीजेपी अब इसकी काट के तौर पर कांशीराम को भारत रत्‍न देने की तैयारी कर रही है। 2019 से पहले बीजेपी के इस दांव का कम से कम उत्‍तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र और पंजाब के दलितों में बेहद सकारात्‍मक संदेश जाए। कांशीराम को भारत रत्‍न देने के लिए मायावती लंबे समय से मांग कर रही हैं। जब वह यूपीए का हिस्‍सा रहीं तब भी ऐसा करने में सफल नहीं रहीं। ऐसे में अगर मोदी सरकार कांशीराम को भारत रत्‍न दे देती है बसपा के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

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    एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अड़ी मोदी सरकार

    एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अड़ी मोदी सरकार

    बीजेपी को दलित विरोधी बताकर विपक्षी उस पर दो बड़े हमले कर रहे हैं। पहला-एससी-एसटी को कमजोर करना, लेकिन इसके लिए मोदी सरकार विधेयक ले आई है। दूसरा- सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा रखी है, लेकिन मोदी सरकार पूरी ताकत के साथ एससी-एसटी कर्मचारियों के लिए प्रमोशन में 22.5 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में खड़ी हो गई है। बीते शुक्रवार को ही मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ी पुनर्विचार याचिका दायर की। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 2006 के नागराज फैसले के चलते एससी/एसटी के लिए प्रमोशन में आरक्षण रुक हुआ है।

    -केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि 2006 का सुप्रीम कोर्ट का नागराज मामले का फैसला प्रमोशन में बाधा बन रहा है।

    -2006 में आए इस फैसले में कहा गया था कि प्रमोशन में रिजर्वेशन देने से पहले यह साबित करना होगा कि सेवा में एससी और एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसके लिए डेटा देना होगा।

    -अटॉर्नी जनरल ने कहा कि नौकरियों में SC/ST के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को कैसे साबित करेंगे? क्या यह हर पद के लिए होगा? या क्या पूरे विभाग के लिए होगा? उन्होंने पूछा कि यह सारे मापदंड कैसे निर्धारित होंगे?

    -अटॉर्नी जनरल ने कहा कि SC/ST समुदाय सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ा रहाहै और SC/ST में पिछड़ेपन को साबित करने की जरूरत नहीं है। 1000 साल से SC/ST जो भुगत रहे हैं, उसे संतुलित करने के लिए एससी/एसटी को आरक्षण दिया गया है।

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    English summary
    modi govt three big step to woo dalit before 2019 lok sabha elections

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