महंगाई से और राहत के लिए मोदी सरकार का बड़ा कदम, कम होंगे सोयाबीन-सूरजमुखी तेलों के दाम
Soyabean-Sunflower Oil Custom Duty news in Hindi: केंद्र सरकार ने महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा कदम उठाया है। मोदी सरकार ने सोयाबीन और सूरजमुखी के तेलों पर सीमा शुल्क को 5 फीसदी घटा दिया है। इसकी अधिसूचना 15 जून, 2023 यानी गुरुवार से ही लागू कर दी गई है।
भारत सरकार ने सोयाबीन और सूरजमुखी तेलों पर सीमा शुल्क 17.5 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक यह कदम जनहित में उठाने का फैसला किया गया है। हालांकि कहा जा रहा है कि घरेलू और विदेशी खाद्य तेलों की कीमतों में पहले से ही चल रही गिरावट के बीच यह कदम उम्मीद से विपरीत है।

खाद्य मुद्रास्पीति को लेकर फैसला!
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कारोबारियों का मानना है कि सीमा शुल्क में कमी करने का फैसला दिखाता है कि सरकार आने वाले चुनावों के मद्देनजर खाद्य मुद्रास्पीति को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित है। ऊपर से वह अल-नीनो के प्रभाव से 2023 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के खराब भविष्य को लेकर भी सतर्क लग रही है।
दूसरे खाद्य तेलों की कीमतें और भी हो सकती हैं कम
माना जा रहा है कि सीमा शुल्क भले ही सिर्फ सोयाबीन और सूरजमुखी तेलों पर कम हुए हैं, लेकिन इसका असर अन्य खाद्य तेलों के दामों पर भी पड़ेगा। वैसे भी अभी बाजार में तिलहन का नया स्टॉक पहुंचा है, जिससे आवक बढ़ी हुई है।
खराब मानसून की आशंका ने भी बढ़ाई है चिंता
एक अनुमान के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 जून तक 53 फीसदी तक कम रहा है। हालांकि, कुछ डीलरों का कहना है कि अब कच्चे और रिफाइंड सोयाबीन और सूरजमुखी तेलों में शुल्क में इतना अंतर हो गया है कि नया शिपमेंट तत्काल पहुंचने की कोई संभावना नहीं है।
दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक है भारत
भारत वनस्पति तेल का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार है। यह मुख्य रूप से अर्जेंटीना, ब्राजील, यूक्रेन और रूस से सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल का आयात करता है। देश में सालाना 24 मीट्रिक टन खाद्य तेल की खपत अनुमानित है, जिसमें से 14 मीट्रिक टन के लिए आयातित तेलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
मई महीने में केंद्र सरकार ने मार्च, 2024 तक 20 लाख मीट्रिक टन तक कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के सालाना आयात पर सीमा शुल्क और कृषि उपकर से छूट दी थी। बता दें कि केंद्र सरकार ने महंगाई को कम करने के लिए हाल में ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं और आरबीआई की चिंताओं के अनुसार ऐक्शन प्लान पर अमल भी शुरू हो चुका है, जिसकी वजह से मुद्रास्फीति दरों में कमी भी दर्ज की जा रही है।












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