क्या विशेष सत्र में देश का ऑफिशियल नाम भारत करने का बिल लाएगी मोदी सरकार?
संसद के विशेष सत्र में क्या सच में इस बार कई बड़े निर्णय लिए जाएंगे? वन नेशन- वन इलेक्शन के अलावा भी केंद्र के एक बड़े कदम का दावा किया जा रहा है। कुछ तथ्य हैं जिन पर नजर डालें तो इन दावों में कितना दम है ये पता चलता है।
देश में अगर अब किसी बात की चर्चा सबसे आगे है तो वो है देश के नाम को लेकर। लेकिन ये बात कहना की देश का नाम बदला जा रहा है, बिल्कुल गलत है। भारत अब सिर्फ एक नाम, यानी भारत के नाम से ही जाना जाय इसके लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी में केंद्र है। लेकिन केंद्र ने अब तक इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है कि क्या वो वाकई में संसद के विशेष सत्र में ये प्रस्ताव लाने जा रही है या फिर नहीं। ऐसे में सवाल ये है कि ये चर्चा क्यों हो रही है? इसका उत्तर जी-20 समिट के दौरान 9 सितंबर को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले भोज के निमंत्रण पत्र में छिपा है।
कयास ये लगाए जा रहे हैं कि संसद के विशेष सत्र में INDIA का नाम बदलकर भारत किया जा सकता है। हालांकि विपक्ष इस पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। बीजेपी पर अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि गठबंधन .N.D.I.A. से सत्तारूढ़ दल के नेता घबराए हुए हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस भारत और इंडिया दोनों नामों के लिए तैयार है। लेकिन असल बात ये है कि भाजपा आईएनडीआईए गठबंधन से डरी हुई है। ऐसे में अब देश का दूसरा नाम इंडिया हटाने की बात की जा रही है।

तमाम दावों के बीच अब सवाल ये है किया सच में अब देश का नाम इंडिया के बजाय सिर्फ भारत ही रहेगा? क्या सरकार कोई ऐसा बिल लाने की तैयारी हैं। अगर ऐसा है तो कब तक इस पर बिल आ सकता है, इन सभी सवालों के जवाब बेहद अहम हैं। हालांकि सरकार ने अब तक संसद के विशेष सत्र में किसी मुद्दों, या फिर बिल को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन कुछ संकेतों के आधार पर दावे सच के काफी करीब दिखते हैं। हालांकि संसद का विशेष सत्र शुरू होते ही एक- एक करके सभी दावों का हकीकत सामने आ जाएगी लेकिन यहां कुछ ऐसे तथ्य हैं, जिनके आधार ये संकेत मिल रहे हैं इस बार पार्लियामेंट के स्पेशल सेशन में कुछ बड़ा होने वाला है।
कैसे होगा देश का नाम 'भारत'?
सरकार अगर संविधान में संशोधन कर 'इंडिया दैट इज भारत शैल बी यूनियन ऑफ स्टेट्स' को बदल कर सिर्फ भारत करना चाहती है तो संविधान के अनुच्छेद 1 और 52 में बदलाव करने होंगे। हालांकि संविधान को अगर हिंदी भाषा में पढ़ेंगे तो उसमें इंडिया का जिक्र नहीं है सिर्फ भारत ही है। अगर सरकार इसमें सिर्फ भारत को ही मान्यता देना चाहती है तो संविधान में बदलाव कर घोषणा करनी होगी कि INDIA को भारत के नाम से बुलाया जाएगा।
क्या देश के नाम से हटेगा 'इंडिया' शब्द?
ये सवाल अब सभी के जुबान पर है। लेकिन इसका उत्तर जानने के लिए हमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ भाषणों में कही गई बातों का जिक्र करना होगा। 15 अगस्त, 2022 को लाल किले की प्राचीर से उन्होंने नागरिकों से पांच प्रतिज्ञाएं लेने की अपील की, जिनमें से एक गुलामी के हर निशान से मुक्ति थी। हाल ही में संपन्न संसद के मानसून सत्र के दौरान, भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने संविधान से 'इंडिया' को हटाने की मांग करते हुए तर्क दिया था कि यह औपनिवेशिक गुलामी का प्रतीक है। भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने भी कहा कि "इंडिया" को "भारत" से बदलने के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत है।
भारत सरकार कर रही विचार: सूत्र
सरकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत की परिभाषा में इस्तेमाल होने वाले वाक्यांश 'इंडिया यानी भारत' से 'इंडिया' शब्द हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। हाल ही में, आरएसएस नेता मोहन भागवत ने भी कहा था कि "हमारे देश का नाम भारत सदियों से अस्तित्व में है", और लोगों से इंडिया के बजाय भारत शब्द का उपयोग करने का आग्रह किया। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्टों में कहा गया है कि विधेयक का मसौदा तैयार करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।












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