SC/ST एक्ट में बदलाव के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की

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    SC/ST Act में Changes के खिलाफ Modi Government की Supreme Court में Review Petition । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। एसएसी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह से देशभर में दलित संगठन और तमाम राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, उसके बाद आखिरकार मोदी सरकार ने झुकने का फैसला ले लिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में इस एक्ट में बदलाव के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है।

    ravishankar

    रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर साधा निशाना

    सरकार की ओर से दायर इस याचिका पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर की है। हमने काफी विस्तृत याचिका कोर्ट में दायर की है, जिसपर वरिष्ठ वकील कोर्ट में सरकार का पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार एसएसी-एसटी एक्ट में किसी भी तरह के बदलाव के पक्ष में नहीं है, कांग्रेस जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लगातार, दलितों, पिछड़ों और शोषितों के लिए काम कर रही है और लोग मोदी सरकार के काम से खुश हैं, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है।

    कांग्रेस ने क्यों नहीं दिया बाबा साहेब को भारत रत्न

    प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर को कांग्रेस ने आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी भारत रत्न नहीं दिया, उन्हें भारत रत्न भाजपा सरकार के कार्यकाल में दिया गया। उन्होंने कहा कि दलितों के प्रति हमारी गंभीरता को आप इस बात से समझ सकते हैं कि देश के वरिष्ठ दलित नेता और भारत के राष्ट्रपति हैं।

    क्यो हो रहा है विरोध

    दरअसल एससी-एसटी एक्ट के तहत जो लोग दलितों और आदिवासियों के साथ उत्पीड़न करते हैं, उन्हें सीधे गिरफ्तार किए जाने का कानून है, लेकिन कोर्ट ने इस नियम में बदलाव किया है। जिसके बाद से तमाम दलित संगठन देशभर में इसका विरोध कर रहे हैं और उन्होंने आज भारत बंद का ऐलान किया है। जिसके बाद लगातार सरकार पर दबाव था कि वह इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे।

    क्या हुआ है बदलाव

    केंद्र सरकार की ओर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। जिसमे कहा गया है कि सीधे गिरफ्तार पर रोक के निर्णय में बदलाव किया जाए। इस नियम का उद्देश्य है कि अधिकार विहीन वर्ग को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस कानून में बदलाव करते हुए जांच से पहले गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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