Mizoram चुनाव में जीत के दावे के साथ क्या ZPM दे रही है बीजेपी के साथ सरकार बनाने का संकेत?
मिजोरम की प्रमुख विपक्षी पार्टी जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) खुद को इस चुनाव में सबसे मजबूत दावेदार मान रही है। आधिकारिक तौर पर पार्टी यही कह रही है कि 3 दिसंबर के बाद वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों के साथ ही समान दूरी बनाए रखेगी और उसे किसी के समर्थन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
जेडपीएम के 74 वर्षीय अध्यक्ष लालदुहोमा का दावा है कि उनकी पार्टी को राज्य में 'भारी जीत' मिलने जा रही है। उनके निशाने पर सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF)है , जिसपर वह दिल्ली में अलग और मिजोरम में अलग चेहरा रखने का आरोप लगाते हैं।

मिजोरम में एमएनएफ को टक्कर दे रही है जेडपीएम
उन्होंने कहा है, 'एमएनएफ एनडीए और नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रैटिक अलायंस (NEDA) का अभिन्न हिस्सा है। यह पूरी तरह से साफ है। इस वजह से उन्होंने अपनी क्षेत्रीयता, पहचान खो दी है और मिश्रित हो गए हैं। उन्होंने मिजो नेशनलिस्ट पार्टी के तौर पर अपनी मूल पवित्रता खो दी है.....जेडपीएम राष्ट्रीय नजरिए वाली एकमात्र असली क्षेत्रीय पार्टी है....'
कांग्रेस दोनों दलों का बीजेपी से तालमेल होने का कर रही है दावा
दरअसल, कांग्रेस लगातार दावा रही है कि जेडपीएम की बीजेपी के साथ गुप्त बातचीत चल रही है और प्रदेश सरकार में हिस्सा बनने के लिए भाजपा लालायित है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी हाल ही में दावा किया था कि सबको पता है कि जेडपीएम और एमएनएफ मिजोरम में बीजेपी के लिए गेटवे की तरह हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी ऐसे ही दावे कर रहे हैं।
जेडपीएम दे रही है बीजेपी के साथ सरकार बनाने का संकेत?
वहीं लालदुहोमा कांग्रेस को लेकर यह दावा कर रहे हैं कि वह राज्य में अब पूरी तरह से निपट चुकी है। इसी तरह से वह बीजेपी के साथ गठबंधन की बात भी नकार रहे हैं। लेकिन, उनके बयान में यह संकेत भी छिपा हुआ है कि चुनाव के बाद की परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि उनके फैसले में बदलाव भी मुमकिन है।
मसलन, उन्होंने कहा है, 'जबतक एमएनएफ एनडीए का सदस्य है, यहां किसी दूसरी पार्टी के लिए संभव नहीं है कि वह एनडीए में शामिल हो।' इसके साथ ही वह कहते हैं, 'हम राष्ट्रीय सत्र पर किसी राजनीतिक गठबंधन में शामिल नहीं होंगे। हम नई दिल्ली के निर्देशों पर नहीं चलना चाहते।' मतलब, वह भाजपा के साथ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को नकार रहे हैं, लेकिन परिस्थितियां पैदा होने पर प्रदेश स्तर पर गठबंधन नहीं करेंगे, यह स्थिति साफ नहीं कर रहे।
बीजेपी को पिछली बार से बेहतर नतीजे की उम्मीद
वहीं मतदान से कुछ दिन पहले बीजेपी का भरोसा बढ़ा है कि वह मिजोरम में भी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खुद लालदुहोमा ने पिछली बार की तुलना में पार्टी की स्थिति में सुधार के संकेत दिए हैं। 2018 में भाजपा राज्य में सिर्फ 1 सीट जीती थी।
राज्य में कांग्रेस लगातार बीजेपी पर आरोप लगा रही है कि वह आदिवासियों की जमीन और जंगल छीन लेगी। यही वजह है कि पार्टी ने राज्य के लोगों को यकीन दिलाना शुरू किया है कि संविधान का आर्टिकल-371 (जी) एक स्थाई प्रावधान है और यह कश्मीर वाले आर्टिकल 370 से उलट है, जो कि अस्थाई था।
भाजपा दोनों को समर्थन देने की कह रही है बात
मिजोरम के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वनुपा जथांग ने ईटी को बताया है कि राज्य में सरकार बनाने में उनकी पार्टी अहम रोल निभाने जा रही है। उन्होंने कहा है, 'एमएनएफ एनडीए का हिस्सा है। अगर त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनती है, हम एमएनएफ और जेडपीएम दोनों का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला हमारा केंद्रीय नेतृत्व लेगा।'
कांग्रेस की ओर से राज्य में बीजेपी-आरएसएस के लिए जो दावे किए जा रहे हैं, उसके खिलाफ एक्स (ट्विटर) पर राज्य में पार्टी के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मोर्चा खोला है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पोस्ट पर ही पलटवार किया है।













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