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Mizoram Election 2023: क्यों हिमंत बिस्वा सरमा ने मिजोरम चुनाव से बना रखी है दूरी?

Mizoram Assembly Election 2023: इस साल मार्च में जब पूर्वोत्तर के तीन राज्यों- त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजे आए थे, तो बीजेपी के शानदार प्रदर्शन का सेहरा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सिर पर बांधा गया था।

आज की तारीख में सरमा निर्विवाद रूप से पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े बीजेपी नेता माने जाते हैं। इसकी वजह ये है कि वे करीब सात वर्षों से नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रैटिक अलायंस (NEDA) के संयोजक हैं, जो केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का ही घटक है।

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पूर्वोत्तर के सबसे बड़े भाजपा नेता हैं सरमा
उत्तर-पूर्व के 8 राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम में से सिर्फ अंतिम दोनों में ही भाजपा सत्ता में नहीं है। वह सिर्फ नागालैंड और मेघालय में गठबंधन सरकार का हिस्सा है और बाकी में तो उसकी अपनी बहुमत की सरकारें हैं। पूर्वोत्तर भारत के भगवामय होने में सरमा का योगदान बहुत बड़ा है।

रिजिजू संभाल रहे हैं मिजोरम के चुनाव अभियान का जिम्मा
इस साल जब पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में बीजेपी के पक्ष वाले परिणाम आए थे, तभी यह चर्चा शुरू हो गई थी कि सरमा के लिए अगली चुनौती मिजोरम होने वाला है। खासकर इस वजह से कि यह क्रिश्चियन बहुल राज्य है। लेकिन, असम के मुख्यमंत्री अभी छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार में ज्यादा व्यस्त दिख रहे हैं और मिजोरम का जिम्मा कम से कम जमीन पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू संभालते दिख रहे हैं, जो कि राज्य के चुनाव प्रभारी हैं।

बीजेपी ने 23 सीटों पर उतारे हैं उम्मीदवार
2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में सिर्फ 1 सीट मिली थी। इस बार पार्टी ने जिन 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक बहुल इलाके हैं।

पार्टी का मुख्य फोकस चकमा, ब्रू, मारा और लाई जैसे भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो दक्षिण मिजोरम के इलाकों में रहते हैं। 2018 में भाजपा ने 39 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से सिर्फ चकमा बहुल तुइचावंग में ही उसे कामयाबी मिली थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पीएम मोदी की यहां सोमवार को ममित में एक सभा होने वाली थी, उसे रद्द कर दिया गया है।

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता कर चुके हैं रैली
वैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी राज्य में पार्टी के लिए प्रचार कर चुके हैं और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की भी यहां रैली कर चुकी है। पिछले हफ्ते उन्होंने राज्य के लिए जो घोषणापत्र जारी किया था, उसमें महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण और असम के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के हल का भी वादा किया गया है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने मिजोरम चुनाव से बना रखी है दूरी?
गौरतलब है कि इस बार मिजोरम विधानसभा चुनाव उस समय हो रहा है, जब पड़ोसी मणिपुर में पिछले 6 महीनों से हालात असामान्य हैं। बड़ी तादाद में मणिपुर के लोग शरणार्थी की तरह मिजोरम में रह रहे हैं। मणिपुर में बीजेपी की सरकार है। ऐसे में सरमा जैसे पूर्वोत्तर में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे का चुनाव अभियान में सक्रिय नहीं रहना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।

जबकि, तथ्य यह है कि इसी साल मारा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (MADC) के लिए जो चुनाव हुए थे, उसमें पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था। 492 ग्राम परिषदों में से बीजेपी ने 232 सीटों पर कब्जा कर लिया था। जबकि, सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट मात्र 127 और कांग्रेस 78 सीटों पर सिमट गई थी।

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