यूपी चुनाव: 84 बरस के पुराने चेतक से होगा बीजेपी का 'कल्याण'?

लखनऊ। आज सुबह से आंनद बाजार पत्रिका में छपी एक खबर ने खलबली मचायी हुई है और वो खबर है कल्याण सिंह की यूपी की राजनीति में वापसी, खबर के मुताबिक बीजेपी कल्याण सिंह को आने वाले चुनाव में अपनी पार्टी का स्टार प्रचारक बनाने जा रही है क्योंकि उसे लगता है कि राज्य के एससी-एसटी वोटों को कल्याण सिंह ही जुटा सकते हैं।

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मालूम हो कि ये वो ही कल्याण सिंह हैं जिन्हें कभी यूपी में कमल खिलाने का श्रेय दिया जाता था लेकिन अपनी एक जिद के कारण उन्हें पार्टी से बेदखल तक होना पड़ा था। भाजपा में बीता हुआ कल साबित हो चुके कल्याण सिंह को आज पार्टी स्टार प्रचारक के रूप में अगर आगे लाना चाहती है तो कहा जा सकता है कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है।

आईये जानते हैं नीचे की स्लाइडों में किन वजह से बीजेपी कल्याण सिंह पर लगाने जा रही हैं दांव..

क्यों हो सकती है वापसी?

क्यों हो सकती है वापसी?

भाजपा को निकट से समझने वाले लोगों का मानना है कि यूपी में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही बीजेपी को लगता है कि शायद कल्याण सिंह 'कालवी' ही यूपी में मायावती के सॉलिड वोट बैंक( एससी-एसटी) को काट सकतेे हैंं।

राम मंदिर मुद्दा

राम मंदिर मुद्दा

भले ही बीजेपी के दिग्गजों ने कह रखा हो कि यूपी में भाजपा का चुनावी मुद्दा केवल विकास होगा, राममंदिर नहीं लेकिन कल्याण को आगे करने से वो बिना कहे ही राम मंदिर मुद्दे को चुनाव में उछाल सकती है और इसी वजह से उसे अपना पुराना भूला हुआ मित्र याद आया है।

राजनीति, प्रशासन और हिंदुत्ववाद

राजनीति, प्रशासन और हिंदुत्ववाद

कल्याण सिंह के पास राजनीति, प्रशासन और हिंदुत्ववाद तीनों का संगम है, वो जब सीएम थे राज्य में काफी सुधार और विकास की चीजें हुई थीं जिसके कारण उन्हें सवर्ण भी पसंद करते हैं और पिछड़ी जाती के लोग भी इस कारण बीजेपी को याद आ रहे हैं कल्याण।

केवल चुनावों के लिए कल्याण

केवल चुनावों के लिए कल्याण

हालांकि आंनद बाजार पत्रिका में छपी खबर कह रही है कि बीजेपी केवल चुनाव प्रचारक के रूप में कल्याण को यूपी लायेगी। चुनावों के बाद कल्याण सिंह वापस राजस्थान लौट जायेंगे, जहां के वो राज्यपाल हैं।

मायावती का दांव

मायावती का दांव

बीजेपी शायद अब वो ही चाल चलने वाली है जो कि मायावती ने चली थी सवर्ण-दलितों को साथ करके, जिसके लिए उन्होंने सतीश मिश्रा जैसे दिग्गज को आगे किया था और राज्य की जनता का भरोसा जीता था। कुछ ऐसा ही शायद बीजेपी के मन भी चल रहा है इसी कारण उसने अपने पुराने चेतक 84 साल के कल्याण पर दांव लगाने की सोची है।

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