Trump PM Modi G7 Summit: 'अगर भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका करेगा मदद', PM मोदी के लिए ट्रंप ने किया बड़ा वादा
Trump PM Modi G7 Summit 2026: फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में हैं।
बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर भारत पर हमला होता है और नरेंद्र मोदी देश के नेता होते हैं, तो अमेरिका भारत की मदद के लिए खड़ा होगा।

ट्रंप का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं।
"जब तक मोदी नेता हैं, भारत बहुत आगे जाएगा"
मई 2025 में हुए Operation Sindoor के बाद, पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की आधिकारिक मुलाकात थी। बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने ही मजाकिया अंदाज में कहा-"अगर मोदी (भारत के) नेता हैं और भारत पर हमला होता है, तो हम उनकी मदद के लिए वहां मौजूद रहेंगे। अगर कोई उस शख्स (पीएम मोदी) पर हमला करता है, तो हम खड़े नहीं रहेंगे।"
इसके बाद हल्के-फुल्के अंदाज में हंसते हुए ट्रंप ने यह भी जोड़ दिया, "हां, अगर वहां कोई नया नेता आता है, तो मैं इस बारे में पक्का नहीं कह सकता।" ट्रंप के इस बयान पर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े। उन्होंने PM Modi की तारीफ करते हुए कहा कि वे एक बहुत ही मजबूत और कड़े नीति-निर्माता हैं और उनके नेतृत्व में भारत लगातार तरक्की करेगा।
'Operation Sindoor' से भारत-अमेरिका रिश्तों में आया था तनाव
यह मुलाकात सिर्फ एक सामान्य बैठक नहीं थी, बल्कि पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव को कम करने की एक बड़ी कोशिश थी। दरअसल, दोनों देशों के रिश्तों में हाल के दिनों में कई वजहों से खटास आई थी। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। उसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। लगभग 88 घंटे चले इस सैन्य टकराव के बाद 10 मई को सीजफायर हुआ था।
सीजफायरा के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उन्होंने मध्यस्थता करके भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया है। भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि यह युद्धविराम पूरी तरह नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच की सीधी बातचीत का नतीजा था, इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाने और भारतीयों के लिए वीजा नियमों (H1B वीजा फीस) को कड़ा करने से भी दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते प्रभावित हुए थे।
अमेरिकी हमले में मारे गए 3 भारतीय नाविकों पर जताया दुख
बैठक के दौरान एक और बेहद संवेदनशील मुद्दा उठा। हाल ही में ओमान के पास खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर भारत में काफी गुस्सा था और भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दो बार अमेरिकी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
इस घटना पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा-"मैंने उस घटना के बारे में सुना है। यह एक बेहद कठिन पेशा है। हम इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।"
तमाम मतभेदों के बावजूद, इस बैठक ने संकेत दे दिया है कि दोनों देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत का दौरा किया था।














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