वेश्यावृत्ति के लिये इंजेक्शन देकर बड़ी की जा रहीं लड़कियां
लखनऊ। बचपन खुशनुमा अहसास है। इसमे सही-गलत का फर्क कर पाने की समझ नहीं होती है। बचपन का मतलब तो बस खुशियां है, लेकिन समाज में कुछ ऐसे भी है जो उनकी इस खुशी को दूसरे के आनंद में बदल देते है। जिस उम्र में बच्चे लड़के-लड़की का फर्क तक नहीं समझ पाते उस उम्र में उन्हें वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल दिया जाता है। वेश्यावृत्ति एक तरह से भुगतान बलात्कार या स्वैच्छिक गुलामी है। इस काले कारोबार में कोई अपनी मर्जी से जाना नहीं चाहता। यहां तो बस मर्द पैसे खर्च कर स्त्री के साथ जो करना चाहे वो कर सकता है।
ये कारोबार दिन के ज्यादा रात के अंधेरे में फूलता है। ना तो इसके लिए कोई कानून है और ना ही कोई धारा इस कारोबार को रोक पाई है। दलालों के दम पर चलता ये कारोबार दिन-पर दिन अपने पैर पसारता जा रहा है। ऐसे में लड़कियों की डिमांड भी बढडती जाती है। एक कॉमन तथ्य है कि इस धंधे में औरतें स्वेच्छा से नहीं आतीं बल्कि वे दलालों के द्वारा लाई जाती हैं। दलाल ही हैं जो गरीबी,अभाव, भुखमरी,दंगा प्रभावित,हिंसा प्रभावित इलाकों में गिद्ध की तरह मंडराते रहते हैं। इन इलाकों में उन्हें धंधे के लिए आसानी से लड़कियां कम से कम दाम में मिल जाती हैं।
इतना ही नहीं स्कूल की छोटी लड़कियां इसके लिए सबसे आसान शिकार होती है, क्योंकि वो ना तो कुछ समझ नहीं पाती और ना तो विरोध कर पाती है। इस कारोबार की जड़े इतनी मजबूत हो गई है कि अब जबरन लड़कियों को इसके लिए तैयार किया जाता है। सुना था कि लौकी और तोड़ी को जल्द बड़ा करने के लिए इंजेक्शन लगाया जदाता है, लेकिन अब ये भूखे दरिंदें छोटी-चोटी बच्चियों को इंजेक्शन से बड़ी बना रहा है। फर्रुखाबाद के एक संस्थान पर लड़कियों के कारोबार का आरोप है। वहां की चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष एमएच सिद्दीकी ने राष्ट्रीय बाल आयोग से शिकायत कर कहा है कि यहां छोटी-छोटी बच्चियों को हार्मोन्स के इंजेक्शन देकर कम उम्र में ही बड़ा किया जाता है और फिर उन्हें वेश्यावृत्ति के धंधे में डाला जाता है।
मामला फार्रुखाबाद के सिकत्तरबाग के एक विश्वविद्यालय का है। यहां से बार-बार शिकायतें मिली है। फरवरी 2012 में तत्कालीन डीएम रोग्जियान फैम्फिल से अनुमित लेकर यहां पर छापा मारा। कई अनियमितताएं पाई गई। वेश्यावृत्ति की इस फैक्ट्री में लड़कियों को कैदियों की तरह रखा जा रहा था। ऐसे 27 लड़कियां है जो 18 वर्ष से कम की है।
लेकिन इन्हें उम्र से पहले ही बड़ा बनाने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं। जब वो तैयार हो जाती है तो उन्हें मुम्बई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में डिमांड पूरा करने के लिए भेज दिया जाता है। इन लड़कियों को जबरन झारखंड, उड़ीसा, कोलकाता जैसे शहरों से पकडकर लाया जाता है। मामला गंभीर और संगीन है, लेकिन इस पर एक्शन लेने की बजाए उसपर टालमटोल होता रहा। अब जब मामला एनसीपीसीआर के पास पहुंचा है तो जांच रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है, हलांकि आस्वासन जरुर मिली है कि जल्द ही इस वेश्यावृत्ति की फैक्ट्री को बंद किया जाएगा।
उम्मीद है कि जल्द ही मासूम लड़कियों को वेश्याओं के कारोबार में जाने से रोक लिया जाएगा, लेकिन सवाल ये कि क्या सिर्फ इस फैक्ट्री को बंद कर देने भर से वेश्यावृत्ति का ये काला सच मिट जाएगा? क्या बच्चियों को वेश्या बनाने वाले इन दलालों से बचाया जा सकेगा? क्या हमारी सरकार इसी तरह सोती रहेगी ? या फिर कोई सख्त कानून इन दलालों को सबक सिखा पाएगा? अगर वेश्यावृत्ति स्वेच्छा का बाजार है तो फिर जबरन इन मासूमों को क्यों इस दलदल में धकेला जा रहा है?

इंजेक्शन से बड़ी हो रही है लड़कियां
वेश्यावृत्ति एक तरह से भुगतान बलात्कार या स्वैच्छिक गुलामी है। इस काले कारोबार में कोई अपनी मर्जी से जाना नहीं चाहता। यहां तो बस मर्द पैसे खर्च कर स्त्री के साथ जो करना चाहे वो कर सकता है।

इंजेक्शन से बड़ी हो रही है लड़कियां
स्वैच्छा के इस बाजार में जबरन लड़कियों को बड़ा बनाकार थकेला जा रहा है। उन्हें इंजेक्शन देकर उम्र से पहले ही बड़ा बनाया जा रहा है।

इंजेक्शन से बड़ी हो रही है लड़कियां
इंजेक्शन के जरिए छोटी-छोटी लड़कियों के हार्मोन्स में परिवर्तन कर उन्हें समय से पहले ही बड़ा बना दिया जाता है। लड़कियों के बड़े होते ही उन्हें वेश्या या कॉलगर्ल बनाकर बाजार में उतार दिया जाता है।

इंजेक्शन से बड़ी हो रही है लड़कियां
दलालों के इस बाजार में लड़कियों को छोटी उम्र में ही छोटे शहरों जैसे कि कोलकाता, बिहार, झारखंड जगहों से अगवा कर लिया जाता है। फिर उनके शरीर को जबरन बड़ा बनाया जाता है।

इंजेक्शन से बड़ी हो रही है लड़कियां
इंजेक्शन से तैयार हुई ये जवान लड़कियां जब ग्राहकों के लिए तैयार हो जाती है तो फिर उन्हें मुबंई, दिल्ली, बैंगलुरु जैसे बड़ा शहरों में भेज दिया जाता है। जहां से लड़की पैसा कमाने की मशीन बन जाती है।












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