130 साल पुराने जेल अधिनियम की गृह मंत्रालय ने की समीक्षा, किया ये बड़ा बदलाव
'जेल अधिनियम, 1894', 'कैदी अधिनियम 1900' और 'कैदियों का स्थानांतरण अधिनियम 1950' की गृह मंत्रालय ने समीक्षा की। इस दौरान 'आदर्श कारागार अधिनियम 2023' में तीनों को शामिल किया गया।

गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को 130 साल पुराने 'जेल अधिनियम, 1894', 'कैदी अधिनियम 1900' और 'कैदियों का स्थानांतरण अधिनियम 1950' समीक्षा की। इन अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को 'आदर्श कारागार अधिनियम' में शामिल किया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि नया अधिनियम कैदियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास और समाज में उनके पुनर्स्थापन पर ध्यान केंद्रित करेगा।
आगे कहा कि आदर्श कारागार अधिनियम, 2023' का मकसद जेल प्रबंधन में सुधार करना और कैदियों को कानून का पालन करने वाले नागरिकों में बदलना है। समाज में उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है। नया कारागार अधिनियम महिलाओं और ट्रांसजेंडर कैदियों की सुरक्षा पर अधिक जोर देगा। जेल प्रबंधन में पारदर्शिता लाएगा और कैदियों के सुधार और पुनर्वास का प्रावधान करेगा।
दो साल पहले 'जेल अधिनियम-1894' में हुआ था फेरबदल
आपको बता दें कि दो साल पहले यानी 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 'जेल अधिनियम-1894' में एक बड़ा संशोधन किया था। जिसके तहत जेलों में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस(मोबाइल, मोबाइल बैटरी, बिना मोबाइल के ही सिम) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। जेल के अंदर अगर कोई कैदी इसका उल्लघंन करते पकडा गया तो उसके खिलाफ जेल प्रशासन नया मुकदमा दर्ज कराएगी।












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