मेटा के Threads से भारत में क्या बदलेगा? एक्सपर्ट ने यूजर्स के लिए बताई काम की बात
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा ने गुरुवार को ट्विटर की तरह एक माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म थ्रेड्स (Threads) लॉन्च किया है। मेटा के हिसाब से यह उसके इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म का ही विस्तार है।
थ्रेड्स में जो फीचर उपलब्ध हैं, उसके बारे में बताया जा रहा है कि वह ट्विटर को ही टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया लगता है। ईटी ने इस नए माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग से भारत में इस तरह के प्लेटफॉर्म पर पड़ने वाले असर को लेकर कई एक्सपर्ट से बात की है। उनको लगता है कि थ्रेड्स यहां ट्विटर के यूजर बेस को नुकसान पहुंचा सकता है।

थ्रेड्स भारतीय युवाओं को आकर्षित कर सकता है
थ्रेड्स भारत में आगे अपना क्या जलवा बिखेरने वाला है, इसको लेकर तो एक्सपर्ट अभी संभावनाए ही जता रहे हैं। लेकिन, लॉन्चिंग के सिर्फ सात घंटे के भीतर 10 मिलियन डाउनलोड्स हो जाना सामान्य घटना नहीं है। यूजर्स इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं और भरपूर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। भारत में खासकर युवाओं को लेकर एक्सपर्ट को लगता है कि यह उन्हें अपनी ओर ज्यादा खींच सकता है।
थ्रेड्स को मिल सकती है सॉलिड शुरुआत-एक्सपर्ट
मेटा के सारे ऐप्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। जानकारों की राय है कि मेटा का यह बाजार थ्रेड्स को देश में एक बहुत सॉलिड शुरुआत दे सकता है। मसलन, रेडसीर स्ट्रैटजी कंसल्टेंट्स के पार्टनर मोहित राणा ने कहा, 'दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स के मुकाबले ट्विटर की भारत में काफी कम मौजूदगी है और इसने देश में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं की है।'
ट्विटर से ज्यादा आकर्षक हो सकता है थ्रेड्स-एक्सपर्ट
उन्होंने कहा, 'मेटा के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। उसके मौजूदा ऐप्स को थ्रेड्स के साथ जोड़ने की उसकी क्षमता को देखते हुए, मुझे लगता है कि मेटा के पास भारतीय बाजार में थ्रेड्स के लिए बहुत अच्छा मौका है। यदि मेटा व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर अपनी सफलता थ्रेड्स के साथ भी दिखा दे, तो ट्विटर के बजाय थ्रेड्स ज्यादा आकर्षक बन सकता है।'
भारत को लेकर ट्विटर की रणनीति अस्पष्ट- एक्सपर्ट
Statista के मुताबिक जनवरी, 2023 में भारत में इंस्टाग्राम के करीब 230 मिलियन यूजर्स थे, जो कि सबसे विशाल है। जबकि, उसके लिए दूसरे नंबर का बाजार अमेरिका था, जहां सिर्फ 143 मिलिययन यूजर्स थे। राणा का कहना है कि ट्विटर ने भारत में हाल के दिनों में अपनी मौजूदगी घटाई है। भारत को लेकर उसकी रणनीति भी तोड़ी अस्पष्ट लगती है।
भारतीय इकोसिस्टम में एडजस्ट कर चुकी है मेटा-एक्सपर्ट
उनकी दलील है कि मेटा भारतीय इकोसिस्टम में खुद को पूरी तरह से एडजस्ट कर चुका है। वह ज्यादा अच्छी तरह से समझता है कि सरकार और विज्ञापनदाताओं के साथ कैसे डील करनी है।
लेकिन, सारे एक्सपर्ट की राय एक जैसी नहीं है और उनके पास इसका ठोस कारण भी है।
'ट्विटर का अपना एक खास यूजरबेस है, जो बहुत मजबूत है'
ऐसे जानकारों को लगता है कि अभी संस्थाएं, सरकारें और समाज के हर वर्ग की लोकप्रिय हस्तियां ट्विटर पर बहुत ही मजबूत स्थिति में हैं। उन्हें थ्रेड्स की ओर देखने में बहुत वक्त लग सकता है। उन्हें लगता है कि इस स्थिति का ट्विटर को लाभ मिल सकता है। जिस तरह से थ्रेड्स के डाउनलोड्स हुए हैं, वह सामाजिक और राजनीतिक जीवन पर प्रभाव डालने में कितना असरदार साबित होता है, इसके लिए वे थोड़ा इंतजार करने के मूड में हैं। जैसे काउंटरप्वाइंट रिसर्च में रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट नील शाह ने कहा है, 'थ्रेड्स की वर्तमान यात्रा में जो दो चीजें गायब हैं, वे हैं कस्टमर सपोर्ट और क्वेरीज...साथ ही बड़े सार्वजनिक संगठनों और सरकारी प्लेटफार्मों की उपस्थिति।'
थ्रेड्स को लेकर चिंताएं क्या हैं?
कुछ एक्सपर्ट थ्रेड्स से जुड़ी प्राइवेसी के खतरे को लेकर भी चिंता जता रहे हैं। इसी वजह से यूरोपियन यूनियन ने इसे ऑपरेट करने की इजाजत भी नहीं दी है। कुछ विशेषज्ञों को यह भी लगता है कि ट्विटर के मुकाबले के लिए बना स्वदेशी ऐप कू (Koo) को भी इससे नुकसान हो सकता है।












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