Exclusive: आइए मिले लें कुछ फक्कड़ सांसदों से

Meeting poorest MPs of 16th Lok Sabha
अगर आप यह मानने लगे हैं कि हमारे सारे सांसद धनी होंगे और संसद पहुंचने के लिए मोटा पैसा चाहिए तो गुस्ताखी माफ आप अपनी राय बदल लें। 16 वीं लोकसभा में इस तरह के बहुत से सांसद चुनकर आए हैं,जिनकी माली हालत कोई बहुत ठोस नहीं है। ये अपने जनसंपर्क और जनता के बीच किए काम के बल पर देश की सबसे अहम पंचायत में पहुंचे हैं। सांसदों के कामकाज से लेकर उनकी माली हालत पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफाम्स (एडीआऱ) की तरफ से तैयार एक रिपोर्ट के आधार पर हमने कुछ 'निर्धन' सांसदों से आपको मिलवाने का फैसला किया। वरिष्ठ लेखक और पत्रकार अरुण कुमार कहते हैं कि जब तक सरस्वती और तेली जैसे सांसद लोकसभा में पहुंचते रहेंगे तब तक हमारा लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।

सबसे पहले मिलिए सुमेधा नंद सरस्वती

से। वे सीकर से भाजपा की टिकट पर जीते हैं। सुमेधा सरस्वती स्वामी के पास कुल जमा 34 हजार रुपये है। वे बताते हैं कि मेरे लिए पैसा ज्यादा या कम होने का कोई मतलब नहीं है। मेरा कोई खास खर्च ही नहीं है। छोटे-मोटे खर्चो के लिए मित्रों से सहयोग मिल जाता है। सुमेधा नंद सरस्वती लंबे समय से समाज सेवा से जुड़े हैं। सीकर में शिक्षा के प्रसार-प्रचार के काम में लगे हैं। 40 साल पहले आर्य समाज को पूरी तरह से समय देने के इरादे से घर छोड़ा। अब परिवार से कोई संबंध नहीं है। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के कई नेता मेरे से संपर्क में थे। उनका आग्रह था कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं ताकि राजनीति में शुचिता के लिए काम किया जा सके।

एक लाख रुपये भी नहीं होगा

अब मिलते हैं सौमित्र खान से। 34 साल के खान विष्णुपुर,पश्चिम बंगाल से त्रिणमुल कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं। शिक्षा हाई स्कूल तक की है।उनकी कुल संपति 11 लाख रुपए है। वे बताते हैं कि चुनाव लड़ने के लिए दोस्तों-साथियों ने मदद की थी। अब तो एक लाख भी नहीं होगा। मुझे पैसे कमाने का कभी शौक नहीं रहा। क्यों सियासत में आए ? मेरे पिताजी मजदूर नेता रहे हैं। इसलिए घर में राजनीति का माहौल था। इसलिए राजनीति में आया। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता रहूंगा।

नौजवान और निर्धन सांसद

इस क्रम में अब बात डा श्रीकांत इकनाथ शिंदे की। वे 16 वीं लोकसभा के सबसे नौजवान सांसदों में होंगे। वे कल्याण,(महाराष्ट्र) से शिव सेना की टिकट पर चुनाव जीते। वे 27 साल के हैं। पेशे से एमबीबीएस डाक्टर हैं। उनकी कुल संपत्ति 9,98 लाख रुपये है। शिंदे ने बताया कि उनके पिता जी आरएसएस से जुड़े हैं। उनकी वजह से ही उनका भी आरएसएस की विचारधारा से संबंध बना। उनकी वजह से मैं कल्याण और उसके आसपास के क्षेत्र में जनता से जुड़े सवालों-समस्याओं को जान सका। आगे चलकर मेडिकल कालेज का छात्र होने के बावजूद शिवसेना से जुड़ गया। उसकी तरफ चलाए जाने वाले आंदोलनों में भाग लेने लगा।

पैसा कमा कर क्या करेंगे

अर्पिता घोष सांसद है बलुरघाट( पश्चिम बंगाल) से त्रिणमुल कांग्रेस पार्टी की। 32 साल की अर्पिता के पास कुल जमा पैसा है 5.44 लाख रुपये। वह कहती है, बहुत पैसा कमा कर क्या करेंगे। मुझे लगता है कि बहुत पैसे से टेंशन ही होती है। वैसे भी मैं अभी अविवाहित हूं। इसलिए पैसे की जरूरत नहीं है। वह राजनीतिक तौर पर एक्टिव तो बचपन से ही थी। घर में देश -दुनिया के सूरते-हाल पर लंबी बातें होती रहती थी। पिताजी के साथ देश-दुनिया की बातों का दौर चलता था।

पैसे का मोह नहीं

रामेश्वर तेली भी एडीआर की उस सूची में सबसे नीचे पाएदान में रहने वाले सांसदों में आते हैं जिनकी संपति बहुत मामूली है। वह बीजेपी की टिकट पर डिब्रुगढ़(असम) से निवार्चित हुए। तेली ने इलेक्शन कमीशन में दायर अपने पर्चे में मात्र 9 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति दिखाई। क्या पैसा कमाने को लेकर मोह नहीं है ? कतई नहीं रामेश्वर तेली चाय बगान में काम करने वाले एक मजदूर के पुत्र हैं।

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