निजामुद्दीन की मरकज इमारत में पुलिस और मेडिकल टीम मौजूद, 860 लोगों को अस्पताल भेजा गया
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के तेजी से बढ़ रहे मामलों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें पूरी कोशिश में लगी हुई हैं। वहीं दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लेने वालों के कारण सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समते कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था।
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अब इनमें से 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया है। 300 लोगों को अस्पतालों में शिफ्ट करना अभी बाकी है। फिलहाल यहां दिल्ली पुलिस और मेडिकल की टीम पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है, 'स्वास्थ्य विभाग की सहायता से 860 लोगों को निजामुद्दीन की मरकज इमारत से निकालकर अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। करीब 300 लोगों को निकालना अभी बाकी है।'
जानकारी के मुताबिक 1 मार्च और 14 मार्च के बाद भी 1,400 लोग यहां रुके हुए थे। बीते दिन सोमवार को निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होने वाले छह लोगों की तेलंगाना में कोरोना वायरस से मौत हो गई। वहीं अंडमान में 10 लोगों की रिपोर्ट में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। इन 10 में 9 लोग वह हैं जो दिल्ली की मरकज में शामिल हुए थे। 10वीं संक्रमित महिला भी इन्हीं में से एक पत्नी है जो दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल हुए थे।
इससे ना केवल दिल्ली सरकार बल्कि अन्य राज्य सरकारों की मुश्किलें भी काफी बढ़ गई हैं। इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया, दो लोगों की मौत गांधी अस्पताल में हुई, एक-एक व्यक्ति की मौत दो निजी अस्पतालों में और एक व्यक्ति की मौत निजामाबाद और एक व्यक्ति की मौत गडवाल शहर में हुई।
इसके बाद जिलाधिकारियों के नेतृत्व में विशेष दलों ने मृतकों के संपर्क में आए लोगों का पता लगा लिया है और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। यहां कोरोना वायरस को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, उनका उल्लंघन किया गया है। जिसके कारण कई जिंदगियों पर खतरा बढ़ गया है।












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