मौलाना कल्बे जव्वाद का पासपोर्ट सस्पेंड, यासीन मलिक का क्यों नहीं?
[अजय मोहन] जेसे ही खबर आयी कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य व शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद का पासपोर्ट भारत सरकार ने निलंबित कर दिया है। तो अजीब सी फीलिंग मेरे दिल में आयी, खैर फीलिंग इसलिये क्योंकि मैं लखनऊ का हूं और बचपन से उन्हें देखता आ रहा हूं, उनके बारे में सुनता, समझता और पढ़ता आ रहा हूं। फिर जब कल्बे जव्वाद का पासपोर्ट निलंबित किये जाने का कारण पता चला, तो मुझे यकीन हो गया कि भारत सरकार की डिक्शनरी में सोशल जस्टिस नाम का शब्द नहीं है। या फिर कूटनीतिक मामलों में भारत दोमुहीं बात कर रहा है।

भारत सरकार ने कल्बे जव्वाद का पासपोर्ट सिर्फ इसलिये निलंबित कर दिया, क्योंकि सरकार को आशंका है कि उनकी वजह से इराक से भारत के रिश्ते खराब हो सकते हैं। मैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी से एक सवाल पूछना चाहूंगा- क्या उन्होंने कभी जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक के पासपोर्ट को रद्दा करने या सस्पेंड करने के बारे में सोचा?
कल्बे जव्वाद से कहा अपना पासपोर्ट सरंडर करें
भारत सरकार द्वारा भेजे गये पत्र में कहा गया है कि पासपोर्ट सस्पेंड करने का कारण उनकी इराक यात्रा है। सरकार को लगता है कि इस यात्रा पर जाने से भारत-इराक के रिश्ते खराब हो सकते हैं। यही नहीं कल्बे जव्वाद से कहा गया है कि वे तुरंत अपना पासपोर्ट सरकार के पास जमा करा दें। हम आपको बताना चाहेंगे कि उनके पासपोर्ट को 4 हफ्तों के लिये सस्पेंड किया गया है।
यासीन मलिक क्यों नहीं?
इसे विडंबना ही कहेंगे कि भारत सरकार ने यासीन मलिक के पासपोर्ट को सस्पेंड करना तो दूर उसे रद्द करने तक के बारे में कभी नहीं सोचा। हाल ही में यासीन मलिक पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में हाफिज सईद के कैम्प में शिरकत करके आये। वही हाफिज़ सईद जिसने मुंबई आतंकी हमले की साजिश रची। [हाल ही में यासीन मलिक और हाफिज सईद के बीच कॉल हुई रिकॉर्ड की डीटेल]

खास बात यह है कि खुद एनआईए और आईबी दोनों ने हाल ही में कंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि यासीन मलिक को हाफिज सईद और आईएसआई मिलकर करीअ 45 लाख रुपए प्रति माह सैलरी देते हैं। दोनों के बीच आये दिन फोन पर बात होती है।
वहीं कल्बे जव्वाद की बात करें तो उन्हें इराक में एक मुस्लिम धर्मगुरुओं की कॉन्फ्रेंस में जाना था। ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा था। कल्बे जव्वाद देश-दुनिया के हर कोने में आते-जाते रहते हैं, लेकिन कभी ऐसा कोई नोटिस नहीं आया। अचानक भारत सरकार का यह नोटिस हजम नहीं होने के निवाले के समान लग रहा है।
मुसलमानों में रोष
यह खबर आते ही लखनऊ में तमाम मुसलमानों ने मोदी सरकार के खिलाफ विरोध जताया है। लखनऊ के शाहकर जैदी ने फेसबुक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि यह मोदी सरकार के अच्दे दिनों की गंदी शुरुआत है। कई अन्य ने लिखा कि इस निर्णय के खिलाफ मुसलमानों को आगे आना चाहिये।












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