शहीद की पत्नी की फेसबुक पोस्ट ने रुला दिया, उनकी देशभक्ति को सलाम

शहीद कैप्टन शफीक घोरी की पत्नी सलमा शफीक घोरी ने अपने पति की 16 वीं पुण्यतिथि पर फेसबुक पोस्ट लिखा है जो शहीदों के पत्नियों के दर्द को बयां कर रहा है।

नई दिल्ली। एक शहीद की पत्नी ने अपने पति की सोलहवीं पुण्यतिथि पर फेसबुक पर एक दिल को छू लेने वाला पोस्ट लिखा है। Beingyou नाम के फेसबुक पेज पर शहीद की पत्नी के पोस्ट को शेयर किया गया है जिसे करीब दो लाख लोग लाइक कर चुके है,22 हजार से ज्यादा लोगों ने कमेंट किया है वहीं 45 हजार लोगों ने पोस्ट को शेयर किया है।

शहीद की विधवा का दिल को छूने वाला पोस्ट

शहीद कैप्टन शफीक घोरी की पत्नी सलमा शफीक घोरी ने अपने पति की 16 वीं पुण्यतिथि पर फेसबुक पोस्ट लिखा है जो शहीदों के पत्नियों के दर्द को बयां कर रहा है। सलमा ने लिखा है' वो मुझे लंबे समय के लिए घर छोड़कर ड्युटी पर चले जाते थे, फिर उन्होंने मुझे एक बार आर्मी वाले की पत्नी होने का मतलब समझाया उस जमाने में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता था, हम दोनों एक दूसरे को पत्र लिखते थे, मुझे उनका रोजाना एक पत्र मिलता था। कुछ समय बाद उनकी ड्युटी हाई रिस्क एरिया में लगी। तब मै पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी थी। मैं जानती थी कि कैप्टन शफीक सबसे पहले अपने देश को प्यार करते हैं फिर उनका परिवार आता है। मुझे उनका आखिरी खत तब मिला, जब मुझे पता चला कि शफीक देश की खातिर कुर्बान हो गए हैं।28 जून 2001 को फोन पर हमारी आखिरी बार बात हुई थी'।

 तब समझ आया आर्मी वाले की पत्नी होने का मतलब

तब समझ आया आर्मी वाले की पत्नी होने का मतलब

शफीक घोरी 1 जुलाई 2001 को जम्मू कश्मीर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।उस समय वह ऑपरेशन रक्षक में थे। सलमा ने अपनी पोस्ट में बताया है कि 21 जुलाई 2001 को शाम 6.30 बजे कुछ आर्मी ऑफिसर्स और उनकी पत्नियां मेरे पास पहुंची। उनमें से एक महिला ने मुझे बैठने के लिए कहा और बताया कि कैप्टन शफीक अब नहीं रहे, मुझे लगा कि मैंने गलत सुना। यह जरूर कोई गलती हुई है। एक आर्मी ऑफिसर की पत्नी ने कहा कि हम लोग सुबह से तुमसे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश करे थे लेकिन फोन पर बात नहीं हो पाई। उसी दिन ही शफीक का आखिरी खत भी मुझे मिला था।

'कभी नहीं लगा शफीक मेरे साथ नहीं हैं'

'कभी नहीं लगा शफीक मेरे साथ नहीं हैं'

सलमा ने अपनी पोस्ट में लिखा है 'सालों बीत गए लेकिन मुझे कभी नहीं लगा शफीक मेरे साथ नहीं है वो मेरे थे और हमेशा मेरे साथ रहेंगे अब मै माता और पिता दोनों की भूमिका निभाती हूं।मैंने शफीक के लिए जीने की ठान ली। मैं शहीद फौजियों के परिवार के कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए कर्नाटक में काम करती हूं।'

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