कड़वा सच: भारत में ससुराल से ज्यादा सड़कों पर सुरक्षित हैं शादीशुदा महिलाएं
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। तीन साल पहले पत्नी के हत्या के जुर्म में पति को मिले उम्र कैद की सजा को बरकरार रखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने जो कहा वो बात सोचने पर मजबूर करती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि भारत में शादीशुदा महिलाएं अपने ससुराल की तुलना में सड़कों पर कहीं अधिक सुरक्षित हैं। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की बेंच ने प्रदीप नाम के एक शख्स की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि आरोपी प्रदीप का मौका ए वारदात से भागना उसके दोषी होने का सबूत है।

कोर्ट ने कहा कि भारत में यह देखा गया है कि हमारे समक्ष हत्या के मामले में हर 10वीं अपील करने वाला दोषी मुजरिम पति है और शिकार पत्नी है और अपराध की जगह ससुराल है। कोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले में हमारे सामने आने वाली 10 में से नौ अपील, जिनकी अपराध की जगह घर से बाहर है और इसमें मृतक व्यक्ति पुरुष है। ऐसा लगता है कि भारत में शादीशुदा महिलाएं अपने ससुराल की तुलना में सड़कों पर कहीं अधिक सुरक्षित हैं।












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