'एक कप चाय से सुलझ सकता है राजस्थान में विवाद', वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस हाईकमान को दी सलाह

नई दिल्ली: राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है। सचिन पायलट पिछले 15 दिनों से नाराज होकर हरियाणा के एक होटल में बागी विधायकों के साथ हैं। इसके बावजूद सोनिया और राहुल गांधी ने अभी तक उनसे मुलाकात नहीं की। इस विवाद को सुलझाने के लिए अब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्ग्रेट अल्वा ने हाईकमान को एक सुझाव दिया है। उनका दावा है कि इस सुझाव पर अलम करने से राजस्थान में विवाद सुलझ सकता है।

सचिन की जमकर तारीफ

सचिन की जमकर तारीफ

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में मार्ग्रेट अल्वा ने कहा कि अगर सोनिया गांधी अशोक गहलोत और सचिन पायलट को 10 जनपथ बुला लें और उनके साथ बैठकर एक प्याली चाय पीएं, तो राजस्थान में चल रहा सियासी संकट खत्म हो सकता है। उन्होंने पायलट की तारीफ करते हुए कहा कि वो एक जुझारू नेता हैं। कांग्रेस के अंदर कोई नहीं चाहता की वो पार्टी छोड़कर जाएं। सचिन उस टीम में शामिल होने वाले थे, जिसे राहुल गांधी बना रहे थे। उन्होंने हाईकमान को सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को अब युवा नेताओं को भी समायोजित करने के तरीके खोजने होंगे।

पहले साधा था निशाना

पहले साधा था निशाना

अभी पिछले हफ्ते मार्ग्रेट अल्वा ने सचिन पायलट पर जमकर हमला बोला था। उन्‍होंने कहा था कि जब सारा देश कोविड-19 महामारी से लड़ रहा है और चीन के साथ सीमा पर गतिरोध बना हुआ है, ऐसे में मुख्यमंत्री बनाए जाने की पायलट की मांग कहां तक जायज है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजस्थान में चुनाव बाद बहुमत की सरकार बनाई थी, जिसमें सचिन पायलट को न सिर्फ उप मुख्यमंत्री बनाया गया, बल्कि चार महत्वपूर्ण विभाग दिए गए। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी बरकरार रखा गया। अल्वा ने कहा कि वो 26 साल की उम्र में सांसद बने। दो बार केंद्रीय मंत्री रहे, प्रदेश अध्यक्ष बने, फिर उप मुख्यमंत्री बने। 25 से 41 साल तक की उम्र के सफर में क्या किसी और को इतना सबकुछ मिला है? अब आप बोल रहे हो कि मुझे मुख्यमंत्री बनाओ।

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    गहलोत का नया दांव

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    राजस्थान का सियासी पारा चरम सीमा पर है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इसी बीच खबर है कि सीएम अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्रा को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें विधानसभा का सत्र बुलाने की बात कही गई है लेकिन इसमें फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं है। सीएम ने प्रस्ताव में लिखा है कि विधानसभा सत्र का एजेंडा कोरोना वायरस है। गहलोत 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं, इस बारे में बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह नए प्रस्ताव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले, राज्यपाल एक प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं।

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