महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन कैसे बन गया राजनीति का खिलौना? 5 संकेत
Maharashtra News: महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन का मुद्दा राजनीति के लिए खिलौने की तरह इस्तेमाल होने लगा है। आंदोलन की अगुवाई करने वाले लोगों से लेकर सियासी पार्टियां, सबको जब भी मौका मिला है, इस खेल को खेलने में कोई पीछे नहीं रहा है।
लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद से कहा जा रहा है कि मराठा आरक्षण आंदोलन की वजह से बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन को बहुत नुकसान हुआ है। लेकिन, इसके बाद इस आरक्षण के विरोध में एक समानांतर ओबीसी नेताओं का आंदोलन भी खड़ा हुआ है, जिससे सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं।

सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ें मराठा आंदोलनकारी- प्रकाश अंबेडकर
मसलन, मंगलवार को वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन चला रहे मनोज जारांगे से कहा कि वह 'गरीब मराठाओं' के हित के लिए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में राज्य की सभी 288 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारें।
अंबेडकर ने कहा, 'अगर वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तो गरीब मराठाओं के मुद्दे सामने आएंगे। अमीर मराठा गरीब मराठाओं को दबा रहे हैं। हालात बदलने के लिए जारांगे निश्चित रूप से सभी सीटों पर चुनाव लड़ें।' वैसे अंबेडकर की सलाह सियासी तौर पर मराठा आंदोलन को किस मकाम की ओर ले जाएगा, यह बहुत बड़ा सवाल है।
मराठा आंदोलनकारियों के साथ तीसरा मोर्चा बनाना चाहते हैं राजू शेट्टी
एक तरफ मनोज जारांगे को सभी सीटों से चुनाव लड़ने की सलाह दी जा रही है, दूसरी तरफ महाराष्ट्र के प्रमुख किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के राजू शेट्टी ने मनोज जारांगे से मिलकर विधानसभा चुनावों के लिए तीसरा मोर्चा बनाने की इच्छा जता दी है।
शेट्टी ने टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, 'बीजेपी के अगुवाई वाला महायुति और महा विकास अघाड़ी (MVA) दोनों का ही ट्रैक रिकॉर्ड छोटी राजनीतिक पार्टियों को मिटाने वाला रहा है, खासकर जो जमीनी आंदोलनों से उभरी हुई हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव इस प्रवृत्ति के सबूत हैं।'
2019 के विधानसभा चुनावों में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन 5 सीटों पर लड़ी थी और एक जीती थी। हाल ही में अपने मराठवाड़ा दौड़े पर वे जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में जारांगे से मिल भी आए हैं।
पीएम मोदी के पास महान दिव्य शक्ति है, उनके पास जाएं- उद्धव ठाकरे
बुधवार को मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनकारी शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित आवास मातोश्री के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। आखिरकार वे आंदोलनकारियों से किसी तरह से मिलने को तैयार हुए और मामले को बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर डायवर्ट करने की कोशिश शुरू कर दी।
उद्धव ने मराठा आंदोलनकारियों से कहा कि 'राज्य सरकार के पास आरक्षण की सीमा बढ़ाने का अधिकार नहीं है। पहले बिहार सरकार ने आरक्षण देने की कोशिश की थी। लेकिन, अदालत ने इसे रद्द कर दिया, क्योंकि सीमा बढ़ाने का अधिकार लोकसभा के पास है। इसलिए समाज के सभी नेताओं को पीएम मोदी के पास जाना होगा। उन्हें समाधान खोजना चाहिए, मैं अपने सभी सांसदों का समर्थन दूंगा।'
वे बोले, 'राज्य सरकार इस मुद्दे का हल नहीं खोज सकती। मैं सभी समुदायों के लोगों से अनुरोध करूंगा कि आरक्षण के लिए राज्य में लड़ने के बजाए, उन्हें दिल्ली जाना चाहिए और उन्हें पीएम मोदी से इस मुद्दे को देखने का आग्रह करना चाहिए, क्योंकि उनके पास महान दिव्य शक्ति है।'
उद्धव ठाकरे की वजह से अटका मराठा आरक्षण- महाराष्ट्र बीजेपी
इसके उलट महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण को रोक दिया था और वो इस समुदाय को कोटा देने के पक्ष में कभी नहीं रहे हैं। दरअसल, उद्धव की पार्टी के कुछ नेताओं ने मातोश्री पर मराठा आंदोलनकारियों के प्रदर्शन को लेकर इसे भाजपा प्रायोजित बताने की कोशिश की थी।
बावनकुले ने कहा, 'उद्धव ठाकरे के खिलाफ ऐसे प्रदर्शन प्रायोजित करने की बीजेपी को जरूरत नहीं है।....वे आंदोलनकारियों से मुलाकात की जल्दी दिखाने की जगह हम पर आरोप लगा रहे हैं.....मराठा आरक्षण को उद्धव ने रोका...इसलिए वे मराठा आंदोलनकारियों से क्यों मिलेंगे?'
भाजपा नेता ने कहा कि जब उनकी (देवेंद्र फडणवीस की) सरकार थी तो उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था, लेकिन जब उद्धव मुख्यमंत्री बने, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में इसे दी गई चुनौती के खिलाफ सख्ती से लड़ना चाहिए था। 'यह सिर्फ उद्धव की नाकामी के चलते खारिज हो गया।'
मराठा आंदोलनकारी के नेता ने भी उलझाया मामला
मराठा आरक्षण आंदोलन को राजनीति के चक्रव्यूह में उलझाने वाले पांचवें किरदार खुद इसकी अगुवाई करने वाले मनोज जारांगे माने जा सकते हैं। कई मौकों पर उनके बयानों से साफ लगा है कि वह मराठा समुदाय के हित से ज्यादा अपना चेहरा चमकाने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
उनके बयान ऐसे हुए हैं, जिससे माहौल बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ है। उनके बयानों की वजह से ही ओबीसी समुदाय का एक वर्ग भी मराठाओं को ओबीसी में शामिल होने देने के खिलाफ खड़ा है। स्थिति यहां तक बन रही है कि शरद पवार जैसे एनसीपी (शरदचंद पवार) के नेता ने भी आशंका जताई है कि महाराष्ट्र में भी मणिपर जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।












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