Mann ki Baat 100th episode: भारत की नारी शक्ति की वो 5 प्रेरक कहानियां, जिन्हें पीएम मोदी ने सराहा
Mann ki Baat 100th episode: पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में हमेशा देश की नारी शक्ति के योगदान को सराहा है। इन पांच महिलाओं के योगदान का देश भी ऋणी रहेगा।

30 अप्रैल, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो पर प्रसारित होने वाले मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 100वीं कड़ी का प्रसारण होना है। अबतक के 99वें एपिसोड में अनेक प्रेरक कहानियों का जिक्र पीएम मोदी ने किया है। हम यहां देश की नारी शक्ति से संबंधित उनमें से पांच प्रेरक कहानियों की चर्चा कर रहे हैं।

लेडी टार्जन जमुना टुडू
झारखंड में जमुना टुडू लेडी टार्जन के नाम से मशहूर रही हैं। उन्होंने टिंबर माफिया और नक्सलियों से लोहा लेने का हौसला दिखाया। उनकी वजह से करीब 50 हेक्टेयर जंगल उजड़ने से बच गए। यही नहीं उन्होंने 10 हजार महिलाओं को पेड़ों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
जमुना टुडू के प्रेरणादायक नेतृत्व का ऐसा असर हुआ कि वहां के गांव वाले एक बच्चे के जन्म पर 18 पेड़ लगाते हैं और जब बेटी की शादी होती है तो 10 पेड़ लगाने की परंपरा बन गई है।

किसान चाची राजकुमारी देवी
बिहार के मुजफ्फरपुर की राजकुमारी देवी अपने नेक कर्मों की वजह से किसान चाची बनकर दूसरों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गईं। राजकुमारी देवी ने अपने क्षेत्र की 300 महिलाओं को स्वंय सहायता समूह से जोड़ने का काम करके उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का कार्य किया।
किसान चाची ने महिलाओं को खेती करना भी सिखाया और रोजगार के अन्य विकल्पों की भी ट्रेनिंग दी। किसान चाची की पीएम मोदी ने इस बात के लिए खासतौर पर सराहा था, क्योंकि उन्होंने खेती के साथ टेक्नोलॉजी को जोड़ने का काम किया।

प्रेरणा से भरी है मुक्ताबेन पंकजकुमार दगली की कहानी
गुजरात की मुक्ताबेन पंकजकुमार दगली खुद दिव्यांग होने के बावजूद दिव्यांग महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए जो योगदान दिया है, उसके उदाहरण नहीं मिलते। उन्होंने चक्षु महिला सेवाकुंज नाम की संस्था की स्थापना की। इसके माध्यम से वो नेत्रहीन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के मिशन में जुट गईं।
गुजरात के सुरेंद्रनगर में उनके द्वारा वोकेशनल स्किल कोर्स भी चलाने की व्यवस्था की गई। नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने शिक्षण संस्थान स्थापित किया।

जल योद्धा बबीता राजपूत
मध्य प्रदेश की बबीता राजपूत दुनिया भर में जल संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा की स्रोत बन सकती हैं। मध्य प्रदेश में पानी के संकट झेलने वाले बुंदेलखंड इलाके से आने वाली बबीता के गांव अगरोथा के नजदीक कभी एक बहुत बड़ी झील हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ वह पूरी तरह से सूख गई।
बबीता राजपूत गांव की अन्य महिलाओं को अपने साथ एकजुट किया और झील तक पानी पहुंचाने के लिए एक नहर बना डाली। परिणाम ये हुआ कि बारिश का पानी झील तक पहुंचाना शुरू हो गया। इस प्रयास से जो झील सूख चुकी थी, वह पानी से भरी रहने लगी।
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ओडिशा की होनहार बेटी कुन्नी देउरी
पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में देश के लिए जिस नारी शक्ति के योगदान को सराहा है, उनमें से ओडिशा की कुन्नी देउरी भी शामिल हैं। उन्होंने सौर ऊर्जा को अपने साथ दूसरी महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम बनाया।
क्योंझर जिला निवासी कुन्नी आदिवासी महिलाओं को सौर ऊर्जा से चलने वाली रीलिंग मशीन पर सिल्क की कताई का प्रशिक्षण देती हैं। उनके इस प्रयास की वजह से आदिवासी महिलाओं को बिजली बिल के बोझ से छुटकारा मिला और उनकी आमदनी बढ़ गई। (तस्वीरें स्रोत- @rashtrapatibhvn और मन की बात के प्रसारण वाला सोशल मीडिया वीडियो)












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