अंदर की बात: 'नीच आदमी' बोलकर घिरे मणिशंकर सिखाते हैं कांग्रेसियों को पॉलिटिक्स की ABC
नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर से अपने बयान को लेकर चर्चा में है, उन्होंने जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी को नीच कहकर संबोधित किया उसको लेकर हर तरफ उनकी आलोचना हो रही है। अय्यर पर ना सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बल्कि विपक्षी दल और खुद राहुल गांधी भी हमला बोला है। राहुल गांधी ने यहां तक कह दिया है कि अय्यर को अपने बयान पर मांफी मांगनी चाहिए, मैं और कांग्रेस उनसे यह उम्मीद करते हैं कि अय्यर अपने बयान के लिए माफी मागेंगे। जिसके बाद अय्यर ने ट्रांसलेशन का हवाला देते हुए अपने बयान पर माफी मांग ली है। लेकिन यहां यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह का बयान देकर ना सिर्फ विवाद खड़ा किया है बल्कि अपनी पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। अय्यर ने इससे पहले भी प्रधानमंत्री को चायवाला कहा था, जिसके बाद उनका यह बयान कांग्रेस पर बहुत भारी पड़ा और इस बयान को 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और भाजपा ने जमकर मुद्दा बनाया।

पार्टी को राजनीति सिखाते हैं अय्यर
बहरहाल अय्यर के बयान पर जहां राहुल गांधी अय्यर से माफी मांगने को कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि मणिशंकर अय्यर कांग्रेस में राजनीति की ट्रेनिंग विभाग के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह पार्टी की नीति प्लानिंग एवं को ऑर्डिनेशन विभाग के भी अध्यक्ष हैं। ऐसे में यह कहना कि अय्यर ने यह बयान गलती से दिया है, वह आसानी से हजम नहीं होता। एक तरफ जहां खुद अय्यर पार्टी के नेताओं को राजनीति की ट्रेनिंग दे रहे हैं तो दूसरी तरफ वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। अय्यर का बयान गुजरात में मतदान से 48 घंटे पहले आया है, जोकि पार्टी के लिए काफी घातक साबित हो सकता है।

पाकिस्तान में रह चुके हैं डिप्लोमैट
मणिशंकर अय्यर ना सिर्फ कद्दावर नेता हैं बल्कि वह बतौर ब्यूरोक्रैट भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 1963 में उनका चयन आईएएफएस में हुआ और उन्होंने केंद्र सरकार में ज्वाइंट सेक्रेटरी की भूमिका निभाई है। यही नहीं 1978 से 1982 के बीच वह पाकिस्तान के कराची में वह भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। वह कराची में भारत के पहले काउंसिल जनरल थे। बतौर डिप्लोमैट आपके शब्दों की भूमिका काफी अहम होती है, इस बात को खुद अय्यर भी समझते हैं, लिहाजा इतने अनुभव के बाद भी अय्यर का पीएम मोदी को लेकर दिया गया बयान उनके राजनीतिक करियर की एक और बड़ी भूल साबित होने जा रही है, जिसका फायदा उठाने से भाजपा कतई पीछे नहीं रहना चाहती है।

कॉलेज में राजीव गांधी के सीनियर थे
मणिशंकर अय्यर पार्टी के लिए इसलिए भी काफी खास नेता हैं क्योंकि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का करीबी माना जाता है, वह राजीव गांधी से सीनियर थे। जिस वक्त राजीव गांधी दून कॉलेज में पढ़ते थे उस वक्त भी अय्यर उनके सीनियर थे और जब वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए तो वहां भी अय्यर राजीव के सीनियर थे। इस लिहाज से दोनों के बीच काफी घनिष्ठ संबंध था। यही नहीं अय्यर ने जब कैंब्रिज विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में उतरे और अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा तो राजीव गांधी ने चुनाव प्रचार में उनका साथ दिया था। इस लिहाज से अय्यर सरीके नेता से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना किसी के भी गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
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