Manipur News: मणिपुर उपद्रव के पीछे वहां की खनिज और गैस संपदा, दावे में कितना दम?
मणिपुर में तीन महीनों से जारी हिंसक संघर्ष के पीछे अब कुछ लोगों का दावा है कि इसकी वजह वहां की खनिज और गैस संपदा है। मुंबई में यह दावा 'फ्रेंड्स ऑफ मणिपुर' बैनर के तहत कुछ ऐक्टिविस्ट की ओर से किया गया है।
खुद को सिविल सोसाइटी का सदस्य बताने वाले ऐसे लोगों का आरोप है कि कुछ प्रमुख उद्योगपतियों की पहाड़ी राज्य मणिपुर में मौजूद विशाल खनिज संपदा और गैस भंडार पर नजर है और संभव है कि इसी वजह से जातीय हिंसा भड़क रही है।

वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 की ओर इशारा
दिलचस्प बात ये है कि इन ऐक्टिविस्ट्स में ट्रस्टी ऑफ सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस की फाउंडर ट्रस्टी और गुजरात दंगों से जुड़े मामलों की वजह से चर्चित तीस्ता सीतलवाड़ भी शामिल हैं। यही नहीं इन लोगों ने मणिपुर हिंसा को 2002 के गुजरात दंगों से भी तुलना करने से भी परहेज नहीं किया है। अपने दावों के समर्थन में ऐक्टिवस्ट ने 26 जुलाई को लोकसभा से पास हुए वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 की ओर भी इशारा किया है।
'उद्योगपतियों के लिए कुकी समुदाय का जमीन हड़पना आसान हो जाएगा'
इस विधेयक का मकसद खास तरह की जमीन को पुराने वन अधिनियम (1980) के दायरे से बाहर करना और छूट देना है। अपने दावों के समर्थन में सीतलवाड़ ने यहां तक कहा कि वन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन से उद्योगपतियों के लिए कुकी समुदाय का जमीन हड़पना आसान हो जाएगा।
मणिपुर में किन खनिजों के भंडार?
मणिपुर में लाइमस्टोन, क्रोमाइट, निकल, तांबा, प्लैटिनम और आइडोक्रेज जैसे मिनरल पाए जाते हैं। राज्य में लाइमस्टोन का संभावित रिजर्व 18.412 मिलियन टन है। जबकि, प्रदेश में क्रोमाइट का 0.38 मिलियन टन का संभावित भंडार है। इसी तरह से बाकी खनिजों के भी वहां पर्याप्त उपलब्धता की संभावना है।
मणिपुर में क्यों शुरू हुआ था संघर्ष?
गौरतलब है कि मणिपुर में कुछ वर्ष पहले प्राकृतिक तेल और गैस की खोज का विरोध भी शुरू हुआ था। दरअसल, पूर्वोत्तर के राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार एक विवादित मसला रहा है। लेकिन, मणिपुर में और केंद्र मे एक ही पार्टी की सरकार होने की वजह से शायद विरोधियों का इस विवाद को ताजा संघर्ष से जोड़ने का मौका मिल गया है। क्योंकि, 3 मई को जो संघर्ष शुरू हुआ था, वह एसटी आरक्षण पर हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद शुरू हुआ था।
विपक्षी दलों के सांसदों ने की गवर्नर से मुलाकात
इस बीच रविवार को विपक्षी दलों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस-इंडिया के 21 सांसदों ने मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की है। इन विपक्षी सांसदों ने राज्य के दो दिनों के अपने दौरे के बाद वहां के हालात को लेकर गवर्नर को एक मेमोरेंडम भी सौंपा है।
मणिपुर की राज्यपाल की सलाह
शनिवार को इस विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने इंफाल, बिष्णुपुर जिले के मोइरांग और चुराचांदपुर में राहत शिविरों का दौरा किया था और जातीय हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात की थी। गवर्नर से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने राज्यपाल के बारे में बताया कि उन्होंने सलाह दी है कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिनमंडल को मणिपुर आकर सभी समुदायों के नेताओं से बात करनी चाहिए। उनके मुताबिक इससे जो वहां एक अविश्वास का माहौल बन गया है, उससे उबरने में सहायता मिलेगी।












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