Manipur Violence: इम्फाल वेस्ट में हिंसक प्रदर्शन, सुरक्षा बलों ने छोड़े आंसू गैस के गोले, क्या है मांग?
Manipur Tronglaobi Incident: मणिपुर एक बार फिर जातीय हिंसा और आक्रोश की भीषण आग में झुलस रहा है। बिष्णुपुर जिले के त्रोन्गलाओबी (Tronglaobi) में हुए एक दिल दहला देने वाले रॉकेट हमले, जिसमें एक बीएसएफ (BSF) जवान के दो मासूम बच्चों की जान चली गई, ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है।
इस घटना के विरोध में शनिवार, 18 अप्रैल को इंफाल वेस्ट के खुराई लामलोंग (Khurai Lamlong) इलाके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

यह घटना 7 अप्रैल, 2026 की रात करीब 1:03 बजे हुई। संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने पहाड़ी इलाके से मोइरांग के त्रोन्गलाओबी अवांग लेकाई स्थित रिहायशी इलाके को निशाना बनाकर लंबी दूरी का रॉकेट (Projectile) दागा।
क्या है त्रोन्गलाओबी हमला? जिसके बाद फिर सुलग रहा मणिपुर
दरअसल, 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के मोइरांग के त्रोन्गलाओबी अवांग लेकाई इलाके में एक बेहद दर्दनाक और कायराना हमला हुआ था। देर रात करीब 1:03 बजे संदिग्ध उग्रवादियों ने एक रिहायशी घर को निशाना बनाते हुए लंबी दूरी का प्रोजेक्टाइल (रॉकेट) दागा। यह रॉकेट सीधे एक बीएसएफ जवान के घर की खिड़की तोड़ते हुए बेडरूम में जा गिरा और जोरदार धमाके के साथ फट गया।
इस हमले में जवान के दो मासूम बच्चों-5 साल के बेटे और महज 5 महीने की बेटी-की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों बच्चे उस समय गहरी नींद में सो रहे थे। बच्चों की मां इस धमाके में गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें तुरंत इम्फाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना के बाद पूरे राज्य में आक्रोश,खुरई लामलोंग में क्यों भड़का प्रदर्शन?
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद पूरे मणिपुर में आक्रोश फैल गया। लोग सड़कों पर उतर आए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। विरोध-प्रदर्शन तेज होने के कारण प्रशासन ने एहतियातन पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दीं, ताकि अफवाहों और भड़काऊ सामग्री को रोका जा सके।
इम्फाल वेस्ट के खुरई लामलोंग इलाके में लोग त्रोन्गलाओबी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
जातीय हिंसा की आग में क्यों जल रहा है मणिपुर?
मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय हिंसा की चपेट में है। कुकी और मैतेयी समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हालांकि हाल ही में दोनों समुदायों के बीच समझौते के बाद नई सरकार का गठन हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। ऐसा मानना है कि अविश्वास, जमीन और पहचान से जुड़े विवाद, और अलग-अलग समुदायों की राजनीतिक मांगें इस हिंसा के पीछे बड़ी वजह हैं।
बफर जोन में सेंध: सुरक्षा बलों द्वारा बनाए गए बफर जोन (पहाड़ी और घाटी के बीच का इलाका) में अब भी उग्रवादी आधुनिक हथियारों और प्रोजेक्टाइल का इस्तेमाल कर घुसपैठ कर रहे हैं।
विश्वास की कमी: शांति समझौते के बावजूद दोनों समुदायों के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि छोटी सी घटना भी बड़े दंगे का रूप ले लेती है।
बाहरी तत्व और अवैध हथियार: नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारी मात्रा में लूटे गए हथियारों की बरामदगी और सीमा पार से हो रही घुसपैठ को रोकना है।
राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। हालांकि, त्रोन्गलाओबी जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि मणिपुर में स्थायी शांति अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।














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