मणिपुर हिंसा की जांच करेगा 3 सदस्यीय पैनल, अमित शाह की ये खास अपील
Manipur Violence: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एक और अपील की। उन्होंने कहा कि इंफाल-दीमापुर, एनएच-2 राजमार्ग पर अवरोध हटा लें, जिससे भोजन, दवाइयां पहुंचाई जा सकें।

Manipur Violence: मणिपुर जातीय हिंसा की जांच के लिए भारत सरकार ने गौहाटी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय लांबा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस जांच में पूर्व आईएएस अधिकारी हिमांशु शेखर दास और पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक प्रभाकर शामिल हैं। उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एक और अपील की है।
शाह ने ट्वीट कर कहा कि पूर्वोत्तर राज्य के लोगों से इंफाल-दीमापुर, एनएच-2 राजमार्ग पर अवरोध हटा लें। जिससे भोजन, दवाइयां, पेट्रोल/डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुएं लोगों तक पहुंचाया जा सके। हाल ही में शाह ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मणिपुर का दौरा किया था। इस दौरान शाह ने राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की थी। जिसका असर भी देखने को मिला। कुछ प्रदर्शनकारियों ने 140 हथियार पुलिस के हवाले कर आत्मसमर्पण किया था।
शाह ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी
शाह ने चेतावनी दी थी कि पुलिस द्वारा तलाशी अभियान के दौरान हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की।
राज्य में लौट रही शांति
बीते दिन यानी शनिवार को मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने कहा कि जातीय संघर्ष और हिंसा की लहर के बाद राज्य में शांति लौट रही है और सामान्य स्थिति बहाल हो रही है। आगे कहा कि पिछले 24 घंटों में मणिपुर में गोलीबारी और आगजनी की कोई घटना नहीं हुई है। इसके अलावा, संयुक्त सुरक्षा बल भी हैं। असम राइफल्स सहित, पिछले 24 घंटों में कई अभियानों में 35 हथियार और 88 बम बरामद किए हैं।
क्या है मणिपुर जातीय हिंसा?
आपको बता दें कि मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में 3 मई को पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन किया गया। जिसके बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में करीब 98 लोगों की मौत हुई जबकि 310 के करीब घायल हुए।









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