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मणिपुर वीडियो मामले में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट, बताया क्यों नहीं मिल पाए पीड़िताओं से?

Manipur Video: मणिपुर हिंसा से जुड़े महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के वायरल वीडियो पर 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः: संज्ञान लेते हुए केंद्र व राज्‍य सरकार को निर्देश जारी किए थे। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई एक रिपोर्ट में गृह मंत्रालय ने बताया कि विरोध के कारण यौन उत्पीड़न पीड़ितों तक नहीं पहुंच सके।

अपनी रिपोर्ट में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 4 मई को मणिपुर में तीन महिलाओं के यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं की दोबारा होने को रोकने के लिए, ऐसे सभी मामलों की सूचना मणिपुर के पुलिस महानिदेशक को देनी होगी, जो सीधे जांच की निगरानी करेंगे।

Manipur Video

20 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि वह वायरल वीडियो को देखकर काफी परेशान है, जो 19 जुलाई को सामने आया था और तब से सोशल मीडिया पर लगातार देखा जा रहा है।

अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से अपराधियों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में बताने और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इसके बाद 28 जुलाई को भारत के गृह सचिव अजय कुमार भल्ला द्वारा एक हलफनामा अदालत में पेश किया गया था।

जिसमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय घटना के सामने आने के बाद से इसके घटनाक्रम की "लगातार निगरानी" कर रहा है। इसी के कोर्ट को जांच सीबीआई को ट्रांसफर करने के फैसले के बारे में भी बताया। साथ ही अपना अनुरोध दोहराया कि केस मणिपुर के बाहर की अदालत में चलाया जाए।

क्योंकि किसी मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट के पास है, इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने हलफनामे में अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में एक आदेश पारित कर निर्देश दिया जाए कि मुकदमा सीबीआई द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने के छह महीने की अवधि के भीतर समाप्त किया जाना चाहिए।

अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीड़ितों की सहायता के लिए चुराचांदपुर जिला अस्पताल के दो मनोचिकित्सकों और एक मनोवैज्ञानिक की एक पूरी तरह से महिला टीम का गठन किया गया है। हालांकि इसमें कहा गया है कि हलफनामा दाखिल करने के समय राज्य अधिकारी "चुराचांदपुर में नागरिक समाज संगठनों के प्रतिरोध" के कारण पीड़ितों तक शारीरिक या टेलिफोनिक रूप से पहुंचने में सक्षम नहीं थे, जहां पीड़ित और उनके परिवार घटना के बाद वहां से चले गए गए थे।

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