मणिपुर: निराशा के बीच आशा की किरण, आश्रय स्थलों में 200 बच्चों का जन्म, विस्थापित महिलाओं ने सुनाई आपबीती

Manipur News: जातीय हिंसा की आग में झुलसे मणिपुर से राहत भरी खबर सामने आई है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। निराशा के दौर में आशा की नई किरण सामने आई है। मणिपुर में 200 बच्चों का जन्म हुआ है। बच्चों का जन्म आश्रय स्थलों में हुआ है।

विस्थापित लोगों के लिए आश्रय स्थल बनाया गया है। इन्ही आश्रय स्थलों में 200 बच्चों का जन्म हुआ है। अपनी बच्ची को गोद में लेते हुए हत्नेउ ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम नगनथोइबी रखा है, जिसका अर्थ रोशनी होता है।

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नगनथोइबी उन 200 बच्चों में से एक है, जिनका जन्म उन विस्थापित महिलाओं से हुआ है, जिन्होंने राज्य भर के विभिन्न राहत शिविरों में शरण ली है। संघर्ष के दौरान हजारों महिलाएं आश्रय स्थल में शरण ली हुई हैं। हत्नेउ जैसी महिलाओं के लिए पिछले महीने काफी यादगर रहा है।

जातीय हिंसा के बीच उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया। वहीं, दूसरी तरफ काकचिंग जिले के राहत शिविर में 26 वर्षीय महिला ने कहा कि जैसे ही मैंने अपने जुड़वां बच्चों को अपनी बाहों में लिया तो मेरे सारे दुख दूर हो गए। उसके जुड़वां बेटे अब चार महीने के हो गए हैं। जब वे बड़े हो जाएंगे तो मैं उन्हें ये कहानियां सुनाऊंगी।

उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए यादगर पल है। मैं इसे वर्षों बाद भी इसी तरह याद रखना चाहती हूं। गर्भावस्था के दौरान महिला का काफी ध्यान रखना होता है। कोई भारी सामान न उठाने, तनाव न लेने और अच्छा खाने के लिए कहा जाता है। लेकिन उन्हें इन सभी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि मैं कुकी हूं, लेकिन मैं हमेशा घाटी में ही रहती हूं। परिस्थितियों के कारण हमें यहां स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ा। पिछले महीने मैंने पास के स्वास्थ्य केंद्र में अपनी बेटी को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम 15 बच्चों को हमारे शिविर में जन्म हुआ है।

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