मणिशंकर अय्यर: कांग्रेस के बड़े बवाली जिन्होंने अपने बयानों से पार्टी की कराई कई बार फजीहत

नई दिल्‍ली। मजाक, तंज, अपमान या सियासी चूक। इन सभी के बीच एक बारीक सी लाइन होती है, वो दिखती तो नहीं लेकिन जरा सी भूल होने पर भारी नुकसान की नींव रख देती है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मणिशंकर अय्यर का ताजा बयान कुछ इसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है। राहुल गांधी को कांग्रेस अध्‍यक्ष बनाए जाने की तुलना अय्यर ने औरंगजेब काल से कर दी है। उन्‍होंने कहा है कि ''जब जहांगीर की जगह शाहजहां आये थे, तब इलेक्शन हुआ था क्या, जब शाहजहां की जगह औरंगजेब आये थे तब इलेक्शन हुआ था क्या, यह तो पहले से सबको पता था कि जो बादशाह है उसके औलाद को ही गद्दी मिलेगी।'' हर बार की तरह इस बार भी मणिशंकर का ये बयान कांग्रेस के लिए मुसीबत बनता नजर आ रहा है।

मणिशंकर अय्यर: कांग्रेस के बड़े बवाली जिन्होंने अपने बयानों से पार्टी की कराई कई बार फजीहत

भारतीय जनता पार्टी ने अय्यर के इस बयान को फौरन लपक लिया और चुनावी मुद्दा बनाकर उछालने लगी है। गुजरात के धरमपुर में रैली में पीएम मोदी ने अय्यर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुद मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी नहीं बल्कि कुनबा है। औरंगजेब राज उनको मुबारक। हमारे लिए देश बड़ा है। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब मणिशंकर अय्यर के बयान ने भाजपा को चुनावी मुद्दा बनाने और मैदान मार ले जाने का मौका दिया हो। इससे पहले भी ऐसा हुआ है। विस्‍तार से जानिए कब-कब?

'चायवाला' बयान कांग्रेस को ले डूबा था

लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान को अपना हथियार बना लिया था जो काफी कारगर साबित हुआ। मणिशंकर अय्यर ने कहा था - मोदी कांग्रेस दफ्तर के बाहर चाय बेचें. वह चायवाला क्या प्रधानमंत्री बनेगा!' इसी बयान को बीजेपी ने चुनावी मुद्दा बना लिया था और कांग्रेस को अब तक की सबसे बुरी हार का मुंह देखना पड़ा था। भाजपा के सोशल मीडिया कैम्पेन और प्रचार तंत्र ने इसे तुरंत लपका और कहा कि कांग्रेस 'गरीब परिवार से आने वाले और बचपन में चाय बेचने वाले' व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनते नहीं देख सकती।

पाकिस्‍तान में कहा था- मोदी सरकार को हटाना होगा

मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्‍तान जाकर वहां एक चैनल को इंटरव्‍यू दिया था। पाकिस्तान के 'दुनिया' टीवी चैनल पर अपनी बात रखते हुए अय्यर ने कहा, 'राष्ट्रपति मुशर्रफ, जो कि फौज के आदमी थे, और हमारे मनमोहन सिंह के बीच तीन साल तक बातचीत जारी रही।' इस पर इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार ने उनसे पूछा कि मौजूदा गतिरोध को दूर करने का क्या तरीका है, इसके जवाब में अय्यर ने कहा, 'इनको (बीजेपी सरकार) हटाइए और हमें ले आइए। और कोई रास्ता नहीं है।' इसपर पत्रकार ने कहा कि यह तो आप लोगों को करना होगा, इसके जवाब में अय्यर ने कहा कि तब तक आप लोग इंतजार कीजिए। इस बयान पर भाजपा काफी हमलावर हुई थी।

अलगावादियों से नजदीकी के चलते कई बार फजीहत

इसी साल 23 मई को टीवी चैनल टाइम्स नाउ ने एक सेमीनार का 51 सेकेंड का वीडियो जारी करते हुए लिखा, "मणिशंकर अय्यर, कपिल काक, विनोद शर्मा, सीताराम येचुरी हुर्रियत नेताओं के साथ सेमीनार में।"कश्मीर स्थित हुर्रियत कांफ्रेस एक अलगाववादी संगठन है। इसके दो धड़े हैं। एक धड़े के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी हैं और दूसरे धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक हैं। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने अपने नेता के शामिल होने का बचाव किया है। ये नेता दिल्ली स्थित थिंक-टैंक सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस (सीपीपी) द्वारा "कश्मीर मुद्दा: भविष्य की राह" विषय पर श्रीनगर में आयोजित सेमीनार में शिरकत कर रहे थे। कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर, पत्रकार विनोद शर्मा और ओपी शाह इस थिंक-टैंक के सदस्य हैं।

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