महाराष्ट्र: अस्पताल बने नर्क, बेड के इंतजार में मां की कोरोना से मौत, दादी का शव कई दिनों तक शौचालय में सड़ता रहा
मुंबई। कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरनाक असर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में देखने को मिला है, यहां हर रोज जिस तरह से लोगों की मौत हो रही है, उसने हालात को काफी भयावह बना दिया है। ना सिर्फ मुंबई बल्कि कई ऐसे शहर भी हैं जहां कोरोना ने लोगों का घर उजाड़ दिया है। मुंबई से तकरीबन 400 किलोमीटर दूर जलगांव में महज 9 दिन के भीतर कोरोना ने एक परिवार के दो लोगों की जान ले ली। यहां हर्शल नेहते की मां टीला नेहते का कोरोना वायरस से निधन हो गया। वह जलगांव सिविल अस्पताल के आईसीयू वार्ड में छह घंटे तक अपनी मां के लिए बेड का इंतजार करते रहे, लेकिन आईसीयू में उन्हें बेड नहीं मिला और टीला नेहते (60) का निधन हो गया।

9 दिन में खो दिया मां-दादी को
हर्शल अपनी मां के निधन के दुख से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि बुधवार को उनकी दादी मालती नेहते (82) का आंशिक रूप से सड़ चुका शव इसी अस्पताल के शौचालय में फर्श पर पड़ा मिला, जिसने अस्पताल के भीतर की हकीकत को लोगों के सामने लाकर रख दिया है। मालती 2 जून से लापता थीं। मालती को कोरोना के आंशिक लक्षण थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था और वह पिछले कुछ दिनों से लापता थीं। अस्पताल के स्टाफ का कहना था कि मालती अस्पताल से बिना बताए चली गईं थीं। आठ दिन तक मालती लापता रहीं और अस्पताल के शौचालय को कोई साफ तक करने नहीं गया, जहां मालती का शव पड़ा था जोकि आंशिक रूप से सड़ गया था।

कई दिन तक शौचालय में पड़ा रहा शव
अस्पताल को 8 दिन बाद शौचालय और मालती की तब सुध आई जब एक मरीज शौचालय कक्ष में गया और यहां एक शौचालय का दरवाजा बंद था। काफी देर तक खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो अस्पताल के मरीज ने इसकी शिकायत अस्पताल से की और बताया कि यहां इतनी तेज बदबू आ रही है कि यह दुर्गंध बर्दाश्त नहीं हो रही। जलगांव के डीएम अविनाश ढकने ने बताया कि इस तरह की घटनाएं लोगों का सिस्टम से भरोसा तोड़ देती हैं। मैंने दो प्राइवेट अस्पताल में कोरोना के मरीजों के इलाज का इंतजाम किया है, सभी गंभीर मरीजों को वहां ट्रांसफर किया जाएगा।

अस्पताल के हालात बदतर
इस घटना के सामने आने के बाद बुधवार को जलगांव सिविल अस्पताल के पांच अधिकारियों जिसमे डीन डॉक्टर बीएस खायरे शामिल हैं उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। मेडिकल एजूकेशन के सेक्रेटरी संजय मुखर्जी ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार मालती से पहले तीन और कोरोना के मरीज जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, शौचालय जाते समय उनकी मौत हो गई। दरअसल अस्पताल में मरीजों के पास बेड पर शौचालय करने के लिए बेडपैन मुहैया नहीं कराए गए हैं क्योंकि कोई भी अस्पताल का स्टाफ उन्हें छूना नहीं चाहता है।

परिवार पर दुख का पहाड़
मालती कोरोना मरीज थीं लेकिन उन्हें संदिग्ध वार्ड में भर्ती किया गया था। बता दें कि कोरोना से मरने वालों की दर सबसे ज्यादा देश में जलगांव में है। दो अन्य विभाग भी मरीजों के इलाज के लिए खोले गए हैं, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से उन्हें सिविल अस्पताल में ही भर्ती किया जा रहा है। हर्शल ने बताया कि मैं सोचता हूं तो कांप जाता हूं वो कैसे चलकर गई होंगी अकेले टॉयलेट तक। वो तो ठीक से चल भी नहीं पाती थीं। हर्शल पुणे में रहते हैं और एक कंपनी में मार्केंटिंग एग्जेक्युटिव हैं। उनकी पत्नी 8 महीने के गर्भ से हैं। हर्शल के पिता तुलसीराम कोरोना संक्रमित हैं और वह नासिक के एक अस्पताल में भर्ती हैं, जहां वो ठीक हो रहे हैं। हर्शल की मां और दादी के अंतिम संस्कार में परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हो सका।












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