Mamata Banerjee: सैलरी-पेंशन का 1 भी रुपया नहीं लेती हैं, इकोनॉमी क्लास में चलने वाली CM कैसे चलाती हैं खर्चा?
Bengal Assembly Elections 2026: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान 23 अप्रैल को होंगे। एक बार फिर 'दीदी' नया इतिहास रचने की तैयारी में हैं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी भारी बहुमत चौथी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के लिए पूरा जोर लगा रहीं हैं। करीब 49 साल से राजनीति में सक्रिय ममता 2011 और 2016 में भी जनता का भरोसा जीत चुकी हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी और आत्मनिर्भरता है।
गजब बात यह है कि दीदी न तो मुख्यमंत्री की सैलरी लेती हैं, न संसद की पेंशन और न ही सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करती हैं। फिर सवाल उठता है कि इतने बड़े पद पर रहते हुए उनका खर्चा कौन चलाता है?

Mamata Banerjee का खुलासा: 'पेंशन और सैलरी, दोनों छोड़ दी'
एक इंटरव्यू में ममता बनर्जी ने खुद बताया कि पिछले 7 साल से उन्होंने न तो अपनी सांसद पेंशन ली है और न ही मुख्यमंत्री की सैलरी। पेंशन की रकम करीब 75 हजार रुपये महीना है, लेकिन दीदी उसे भी छूती नहीं।
- कोई आधिकारिक गाड़ी नहीं
- यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास ही
- गेस्ट हाउस में ठहरना पड़े तो खुद के पैसे
ये सब सुनकर हैरानी होती है, लेकिन ममता बनर्जी के लिए ये जीवनशैली सालों से चली आ रही है।
तो पैसा आता कहां से? दीदी का जवाब
Mamata Banerjee ने साफ बताया कि उनकी आय का मुख्य स्रोत उनकी किताबें और गीत हैं।
- 1. किताबें : अब तक उनकी 86-87 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें कई बेस्टसेलर भी शामिल हैं। किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी ही उनके लिए काफी है। सालाना इस स्रोत से उन्हें 10-11 लाख रुपये मिल जाते हैं।
- 2. गीत लिखना: ममता गानों के बोल भी लिखती हैं। जिस प्रोडक्शन हाउस के लिए वे लिरिक्स देती हैं, वह उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये देता है।
- 3. पेंटिंग : पेंटिंग उनका शौक है, लेकिन जो भी कमाई इसमें से होती है, वो वे पूरी तरह दान कर देती हैं।
दीदी का अपना तर्क
ममता कहती हैं, 'मैं अकेली हूं। मुझे ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं पड़ती। जो कमाती हूं, उसी में आराम से गुजर-बसर हो जाती है।'
Mamata Banerjee Net Worth: ममता बनर्जी की संपत्ति कितनी?
ममता की हलफनामे के मुताबिक, कुल संपत्ति 16 लाख रुपए है। कोई देनदारियां नहीं, न कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड। पढाई की बात करें तो, कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर से एमए (1977 में, परीक्षा 1979 में आयोजित), कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीन जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से एलएलबी (1982 में) हैं।
एक साधारण परिवार से निकली 'लौह महिला'
5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक सामान्य परिवार में जन्मी ममता बनर्जी ने राजनीति में संघर्ष की मिसाल कायम की। केंद्र में वे कोयला, मानव संसाधन विकास, रेलवे और महिला-बाल विकास मंत्रालय संभाल चुकी हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी नहीं छोड़ी।
आज जब ज्यादातर नेता सरकारी सुविधाओं पर चलते दिखते हैं, तब ममता बनर्जी का ये स्टाइल युवाओं को भी सोचने पर मजबूर कर देता है कि सत्ता में रहते हुए भी सादगी और आत्मनिर्भरता का एक अलग उदाहरण।
ममता बनर्जी साबित करती हैं कि राजनीति में बड़ा पद संभालने के लिए सैलरी या पेंशन की जरूरत नहीं होती। उनकी आय का स्रोत उनकी रचनात्मकता है कि किताबें, गीत और ईमानदारी। दीदी की ये सादगी ही उन्हें जनता के दिलों में अलग जगह दिलाती है।












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