Mamata Banerjee के दोनों PSO बदले, महुआ बोलीं- 'बेशर्म सरकार'; आखिर होता क्या है पीएसओ?
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। खबरों के मुताबिक ममता की सुरक्षा में तैनात दोनों पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) बदल दिए गए हैं। TMC ने इसे चुनाव में हार के बाद सुरक्षा में कटौती और 'सियासी बदले' की कार्रवाई करार दिया है, जबकि राज्य पुलिस सूत्रों ने सुरक्षा में किसी भी तरह की कटौती से इनकार किया है।
आपको बता दें कि ममता की सुरक्षा में दोनों पीएसओ पिछले 20 साल से तैनात थे, फिलहाल इस मामले पर जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। आइए जानते है कि PSO होते कौन हैं, इन्हें कौन बदल या हटा सकता है, क्या हैं नियम और इन्हें कितनी सैलरी मिलती है?

कौन होते हैं PSO?
PSO यानी पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मी या सुरक्षाकर्मी होते हैं, जो किसी VIP, नेता या खतरे की आशंका वाले व्यक्ति की निजी सुरक्षा में तैनात किए जाते हैं। ये हर समय संबंधित व्यक्ति के साथ रहते हैं।
PSO को बदलने का अधिकार किसके पास होता है?
- मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अन्य वीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम अधिकार राज्य के गृह विभाग के पास होता है। गृह विभाग के निर्देश पर PSO बदला जा सकता है। राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा जरूरतों के आधार पर PSO की तैनाती बदल सकते हैं।
- वीआईपी किसी PSO को हटाने या बदलने की मांग कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का होता है।
- सुरक्षा कारणों से कई बार वीआईपी की इच्छा के खिलाफ भी PSO तैनात रखा जाता है।
VIP सुरक्षा की कौन-कौन सी कैटेगरी होती हैं? (Z+, Z, Y+, Y, X)
भारत में VIP सुरक्षा खतरे के आकलन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में दी जाती है:
- Z+: सबसे ऊंची श्रेणी, आमतौर पर 55 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी।
- Z: करीब 22 सुरक्षाकर्मी।
- Y+ और Y: करीब 11 सुरक्षाकर्मी।
- X: आमतौर पर 1 से 2 सुरक्षाकर्मी (PSO)।
PSO कौन बदल या हटा सकता है? क्या हैं नियम?
किसी नेता या VIP की सुरक्षा खतरे के आकलन पर आधारित होती है और समय-समय पर इसकी समीक्षा होती है। राज्य के नेता जैसे मुख्यमंत्री या पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा का फैसला आमतौर पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन करते हैं, जो खुफिया रिपोर्ट के आधार पर तय होता है। सरकार बदलने या खतरे का स्तर बदलने पर सुरक्षा की समीक्षा कर PSO या सुरक्षा घेरे में बदलाव किया जा सकता है।
PSO को कितनी सैलरी मिलती है?
PSO को अलग से कोई खास सैलरी नहीं मिलती। दरअसल ये सेवारत पुलिसकर्मी होते हैं और इन्हें अपने पद (कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, ASI, सब-इंस्पेक्टर आदि) के मुताबिक राज्य पुलिस के वेतनमान और भत्तों के अनुसार ही वेतन मिलता है यानी PSO की कमाई उसके पुलिस रैंक और पे-स्केल पर निर्भर करती है, न कि किसी VIP की ड्यूटी पर।
ममता बनर्जी PSO बदले को भड़कीं महुआ मोइत्रा
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इसको लेकर सुवेंदु सरकार पर निशाना साधा है और कहा कि 'से सबकुछ बदले की राजनीति के मद्देनजर किया गया है। उन्होंने इसे सरकार की बेशर्मी कहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि 'इस तरह @MamataOfficial, जो 3 बार CM और 7 बार MP रह चुकी हैं, उन्हें बेशर्म और बदले की भावना रखने वाली BJP सरकार अपमानित कर रही है और खतरे में डाल रही है। वहीं दूसरी ओर, मोहन भागवत हमारे पैसे पर XYZ+++ सुरक्षा और सैकड़ों कमांडो गाड़ियों का आनंद ले रहे हैं।'
ममता की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं हुई है-राज्य पुलिस
राज्य पुलिस ने साफ किया कि ममता की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं हुई है, सिर्फ उनकी सुरक्षा में तैनात दो PSO को बदला गया है। उन्हें अभी भी Z+ (जेड-प्लस) श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। मालूम हो कि 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद ममता बनर्जी सत्ता से बाहर हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी सुरक्षा और प्रोटोकॉल की समीक्षा होना एक प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा रही है लेकिन TMC इसे सियासी बदले से जोड़कर देख रही है, जबकि सरकार इसे रूटीन बदलाव बता रही है।
ममता PSO विवाद से जुड़ी खास बातें
- ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात दो PSO बदले गए।
- TMC का आरोप: सुरक्षा में कटौती नहीं ये है सियासी बदला।
- राज्य पुलिस का दावा: कोई कटौती नहीं, सिर्फ दो PSO बदले गए।
- PSO की तैनाती खतरे के आकलन पर आधारित, स्थायी अधिकार नहीं।
- सुरक्षा श्रेणी (Z+/Z/Y/X) खुफिया रिपोर्ट के आधार पर तय होती है।














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