'महुआ मोइत्रा को समझना चाहिए कि वह सांसद हैं': एथिक्स कमेटी में क्या हुआ? महिला सदस्य ने बताई अंदर की बात

महुआ मोइत्रा के खिलाफ कैश फॉर क्वेरी मामले की जांच में शामिल रहीं एथिक्स कमेटी की एक सदस्य अपराजिता सारंगी ने कहा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और टीएमसी सांसद को समझना चाहिए कि वह एक संसद सदस्य हैं।

गौरतलब है कि लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने संसद में सवाल पूछने के बदले रिश्वत लेने के आरोपों की जांच के बाद स्पीकर ओम बिड़ला से महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासन की सिफारिश की है।

aparajita sarangi on mahua moitra

लोकसभा के स्पीकर आगे का फैसला करेंगे- अपराजिता सारंगी
सारंगी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, 'कल की बैठक में यह फैसला किया गया कि हम टीएमसी एमपी महुआ मोइत्रा के निलंबन का आवेदन लोकसभा स्पीकर को भेजेंगे। कल वोटिंग की गई, जिसमें 6 लोग समर्थन में और 4 विरोध में थे। मैं समझती हूं कि एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद सोनकर आज या कल रिपोर्ट भेज देंगे। इसके बाद लोकसभा के स्पीकर आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे।'

हीरानंदानी को क्रॉस-एग्जामिनेशन के लिए क्यों नहीं बुलाया?
इसके बाद उन्होंने कहा कि दुबई में रहने वाले बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी को क्रॉस-एग्जामिनेशन के लिए नहीं बुलाया गया, क्योंकि उन्होंने पहले ही हलफनामा दायर कर दिया था।

महुआ मोइत्रा को समझना चाहिए कि वह एक संसद सदस्य हैं- एथिक्स कमेटी की महिला सदस्य
अपराजिता सारंगी ने कहा, 'एथिक्स कमेटी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि हीरानंदानी को क्रॉस-एग्जामिनेशन के लिए नहीं बुलाया जाएगा, क्योंकि उन्होंने हलफनामा दे दिया है। इसके बारे में आईटी, गृह मामले और विदेश मामलों के मंत्रालयों से भी चर्चा की गई और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। अगर हम अपनी व्यवस्था को कमजोर करेंगे तब यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन जाएगा। महुआ की ऐसी नकारात्मक प्रतिक्रिया आनी ही थी। उन्हें समझना चाहिए कि वह एक संसद सदस्य हैं। वह जनता की प्रतिनिधि हैं। हम सभी को अपने बर्ताव, विचार और मूल्यो में कुछ संयम बरतना पड़ता है।'

'एनआईसी के नियमों के तहत क्रेडेंशियल्स साझा नहीं कर सकते'
उन्होंने यह भी कहा है कि नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के नियमों के मुताबिक पहली चीज यही है कि आप अपने क्रेडेंशियल्स किसी के साथ साझा नहीं करें।

बीजेपी सांसद ने कहा, 'अगर कोई ये क्रेडेंसियल्स किसी के साथ साझा करते हैं तो यह गलत है। आप अपने स्टाफ को यह दे सकते हैं, तब दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्होंने ये क्रेडेंशियल्स दुबई के एक बिजनेसमैन को दे दिया, जिसकी भारत में कारोबार करने की दिलचस्पी थी। अगर एनआईसी के नियमों को देखें तो पहली चीज यही है कि क्रेडेंशियल्स शेयर नहीं करना चाहिए।'

'महुआ ने अनैतिक कार्य किया तो मैच फिक्सिंग कहां से हो गया?'
उन्होंने एथिक्स कमेटी के अंदर हुई चर्चा के बारे में आगे जानकारी दी कि 'फिर मनी ट्रेल का मामला आया। हीरानंदानी ने जो शपथपत्र (sworn affidavit) दिया है, वह आधिकारिक है। उस शपथपत्र में जो कुछ लिखा है वह सत्य है। जब महुआ ने अनैतिक कार्य किया तो मैच फिक्सिंग कहां से हो गया? लोकसभा में 543 सदस्य हैं, फिर महुआ का नाम ही क्यों आया? प्रश्न प्रक्रिया के तहत ही पूछे गए थे।'

महुआ के खिलाफ सही से नहीं हुई जांच- एथिक्स कमेटी के सदस्य गिरधारी यादव
इससे पहले शुक्रवार को ही एथिक्स कमेटी के एक और सदस्य और जेडीयू सांसद गिरधारी लाल यादव ने आरोप लगाया था कि महुआ के खिलाफ आरोपों की जांच सही से नहीं हुई और कहा कि यह बैठक दो मिनट में ही खत्म हो गई। वहीं महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि उनके मामले में एथिक्स कमेटी ने कंगारू कोर्ट की तरह काम किया है।

महुआ ने एथिक्स कमेटी को कहा है 'कंगारू कोर्ट'
टीएमसी सांसद ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किया, 'संसदीय इतिहास में एथिक्स कमेटी के माध्यम से अनैतिक रूप से निष्कासित होने वाली पहली व्यक्ति के रूप में जाने पर गर्व है, जिसके मैनडेट में निष्कासन शामिल नहीं है। पहले निष्कासन करें और तब सरकार से कहें कि सीबीआई से कहे कि सबूत खोजे। कंगारू कोर्ट, शुरू से अंत तक बंदरबांट का कारोबार......'

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