Population Control Bill: बच्चे पैदा करें या नहीं? इस मुद्दे पर मचा घमासान, किस देश हो रही वोटिंग?
Population Control Bill: स्विट्जरलैंड में इस एक ऐसे मुद्दे पर वोटिंग कर रहा है जिसको लेकर भारत समय कई देशों में बहस छिड़ गई है। दरअसल स्विट्जरलैंड इस वीकेंड पॉपुलेशन के मुद्दे पर वोटिंग कर रहा है जिसका असर आने वाले कई दशकों तक देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर पड़ सकता है। देश की जनता इस बात पर मतदान कर रही है कि क्या स्विट्जरलैंड की कुल आबादी को अधिकतम 1 करोड़ (10 मिलियन) लोगों तक सीमित कर दिया जाए या फिर और बच्चें पैदा करें। यह फैसला किसी भी देश में सामूहिक तौर पर होना क्यों बड़ा माना जा रहा है, इसे समझेंगे।
क्यों विरोध कर रहे इकोनॉमिस्ट?
इस प्रस्ताव को दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (SVP) ने आगे बढ़ाया है। हालांकि सरकार, संसद, बड़े उद्योग संगठन और इकोनॉमिस्ट इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर यह प्रस्ताव पास हो गया तो स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।

2050 तक आबादी को 1 करोड़ तक सीमित करने की योजना
यदि यह प्रस्ताव जनमत संग्रह में पास हो जाता है, तो स्विस सरकार को साल 2050 तक आबादी को 1 करोड़ की सीमा के अंदर रखने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक, जैसे ही देश की आबादी 95 लाख (9.5 मिलियन) तक पहुंचेगी, सरकार को कई प्रतिबंध लागू करने होंगे। इनमें नए निवास परमिट जारी करने पर रोक, परिवार में नए बच्चें पैदा करने पर कंट्रोल और शरणार्थियों के प्रवेश को सीमित करना शामिल है।
EU को क्या दिक्कत?
इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों पर पड़ सकता है। SVP के प्रस्ताव के मुताबिक, यदि जनसंख्या सीमा पार होती है, तो सरकार को EU के साथ किए गए लोगों के Free Movement of People समझौते से बाहर निकलना पड़ेगा। यदि ऐसा हुआ, तो स्विट्जरलैंड की EU के बड़े सिंगल मार्केट तक पहुंच भी खत्म हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापार, इन्वेस्टमेंट और जॉब्स पर बुरा असर पड़ सकता है।
2002 के बाद तेजी से बढ़ी आबादी
स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त आवागमन समझौता साल 2002 में लागू हुआ था। इसके बाद बड़ी संख्या में विदेशी कामगार स्विट्जरलैंड पहुंचे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2002 के बाद से स्विट्जरलैंड की कुल आबादी में 23 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान देश के कुल आर्थिक उत्पादन यानी GDP में लगभग 24 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। यानी आबादी और अर्थव्यवस्था दोनों लगभग समान गति से बढ़े हैं।
कैसे होता है स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह?
स्विट्जरलैंड की राजनीतिक व्यवस्था दुनिया में सबसे मजबूत प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) मानी जाती है। यहां यदि किसी लोकप्रिय पहल (Popular Initiative) को 18 महीनों के भीतर 1 लाख लोगों का समर्थन मिल जाता है, तो उस मुद्दे पर पूरे देश में मतदान कराया जाता है। SVP लंबे समय से इसी व्यवस्था का उपयोग करते हुए आप्रवासन (Immigration) विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाती रही है।
विदेशी नागरिकों को लेकर क्यों हो रही है बहस?
वर्तमान में स्विट्जरलैंड की कुल आबादी का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा विदेशी नागरिकों का है। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि लगातार बढ़ती विदेशी आबादी के कारण घर, ट्रांसपोर्ट, स्कूल, सामाजिक कल्याण योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है। SVP ने अपने चुनाव प्रचार में कहा कि-
"अनकंट्रोल इमीग्रेशन के कारण स्विट्जरलैंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है और इसके नकारात्मक प्रभाव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में दिखाई दे रहे हैं।"पार्टी का मानना है कि आबादी की सीमा तय करने से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकेगा।
सरकार और इंडस्ट्रियलिस्ट क्यों कर रहे हैं विरोध?
स्विट्जरलैंड की सात सदस्यीय केंद्रीय सरकार इस प्रस्ताव के पूरी तरह खिलाफ है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। इसके अलावा संसद के दोनों सदनों में भी इस प्रस्ताव का विरोध किया गया है। देश के सबसे बड़े मजदूर, स्विस एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन और बड़ी व्यापारिक संस्था EconomySuisse भी इसके खिलाफ हैं। उनका मानना है कि आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को केवल आबादी को बढ़ने से रोककर कंट्रोल नहीं किया जा सकता।
उनका तर्क है कि देश की क्षमता के मुताबिक ही लोगों को आने दिया जाना चाहिए।
भविष्य को लेकर क्या टेंशन?
यूरोप के कई देशों की तरह स्विट्जरलैंड में भी जन्मदर लगातार घट रही है। अनुमान के मुताबिक, साल 2055 तक 65 साल से अधिक उम्र के लोगों का अनुपात 21 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगा। ऐसे में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश को भविष्य में और अधिक विदेशी कामगारों की जरूरत पड़ सकती है, ताकि श्रम बाजार और अर्थव्यवस्था को संतुलित रखा जा सके।
क्या दुनिया में कहीं ऐसा मॉडल मौजूद है?
पॉपुलेशन एक्सपर्ट फिलिप वानर के मुताबिक, दुनिया के कई देश प्रवासन को कंट्रोल करते हैं, लेकिन किसी भी देश ने सीधे मतदान के जरिए अपनी कुल आबादी की सीमा तय नहीं की है। हालांकि चीन जैसे देशों ने अतीत में कानूनों के जरिए जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कोशिश की थी, लेकिन स्विट्जरलैंड का यह प्रस्ताव पूरी तरह अलग और अनोखा माना जा रहा है।
रविवार को आएगा फैसला
रविवार को मतदान केंद्र सीमित समय के लिए खुलेंगे, लेकिन स्विट्जरलैंड में लगभग 90 प्रतिशत लोग डाक द्वारा मतदान करते हैं। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर बहुमत हासिल करना ही काफी नहीं होगा। इसे देश के 23 पूर्ण और 6 अर्ध-कैंटन में से अधिकांश का समर्थन भी प्राप्त करना होगा। पूरी दुनिया की नजर अब इस ऐतिहासिक वोटिंग पर टिकी हुई है।
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