वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर क्यों हो रहा जसपाल राणा का अंतिम संस्कार? वजह जानकार टूट जाएगा दिल
Jaspal Rana: भारतीय खेल जगत के एक सुनहरे अध्याय का अंत बेहद दुखद तरीके से हुआ है। अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित महान निशानेबाज जसपाल राणा का निधन शुक्रवार को हो गया। जर्मनी के म्यूनिख से लौटने के बाद हुए इस हादसे के बाद खेल प्रेमी स्तब्ध हैं। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने के लिए बाबा विश्वनाथ की नगरी को चुना गया है।
निशानेबाजी में देश का परचम लहराने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी का अंतिम संस्कार वाराणसी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर किया जा रहा है। खेल प्रेमियों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले और दिल्ली को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले इस महान चैंपियन के अंतिम सफर के लिए काशी के इसी घाट को क्यों चुना गया।

वाराणसी में अंतिम संस्कार का क्या कारण
परिवार अपनी मर्जी से जसपाल राणा का अंतिम संस्कार वाराणसी में नहीं कर रहा है। इस दिग्गज शूटर की इच्छा रही है कि उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाए। जसपाल के परिवार के सदस्यों के मुताबिक़ इस बारे में जसपाल ने कई बार कहा था, इसी कारण उत्तराखंड के बजाय अंतिम संस्कार वाराणसी में करने का फैसला लिया।
मणिकर्णिका घाट की क्यों?
हिंदू सनातन परंपरा में मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि इस घाट पर अंतिम संस्कार होने से आत्मा को जन्म और मृत्यु के चक्र से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। माना जाता है कि काशी के इस तट को स्वयं भगवान शिव का सानिध्य प्राप्त है जो मृत आत्मा के कान में तारक मंत्र फूंकते हैं।
मनु भाकर की आंखें हो गईं नम
शुक्रवार की शाम को जसपाल राणा का शव उनके उत्तराखंड स्थित गांव में लेकर जाया गया। पिता सहित परिवार के सदस्य काफी भावुक हो गए। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी अपने गुरु का शव देखकर रोने लग गईं थी, उनके फोटो और वीडियो भी वायरल हुए थे।












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