महाराष्ट्र का नाटक: संजय राउत ने बताए 3 संकेत जिससे अजित पवार पर शक हुआ था
मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे के सीएम बनने की खबर को ठीक से 12 घंटे भी नहीं हुए थे कि बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की मदद से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले डाली। शिवसेना के नेता संजय राउत की मानें को शुक्रवार को एनसीपी नेता अजित पवार की तरफ से उन्हें कुछ ऐसे इशारे मिल गए थे जिनसे शक होने लगा था कि कुछ होने वाला है। दूसरी ओर इस पूरे 'मास्टरस्ट्रोक' ने पिछले करीब एक माह से जारी अनिश्चितता को फिलहाल खत्म कर दिया है।

पवार हैं सबसे बड़े खिलाड़ी
इस खेल में एनसीपी के विधायक और मुखिया शरद पवार के भतीजे अजित पवार को सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। राउत ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन बातों की तरफ इशारा किया जिससे उन्हें संकेत मिले थे कि शायद सरकार बनने का उनका सपना अजित पवार की वजह से टूट सकता है।

रात 9 बजे तक मीटिंग में थे पवार
राउत ने कहा शुक्रवार को एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना, तीनों दलों की मीटिंग में रात 9 बजे तक अजित पवार शामिल थे। मगर बीच में वो थोड़ी देर के लिए उठकर गए थे और इस वजह से उन्हें पवार पर थोड़ा सा शक हुआ था। राउत ने यह भी कहा कि पवार जिस समय बात कर रहे थे तो उस समय भी वह नजरें नहीं मिला रहे थे उनकी बॉडी लैंग्वेंज में कहीं चोर नजर आ रहा था।

सीएम बनना है पवार का सपना
महाराष्ट्र में 23 नवंबर को जो कुछ हुआ उसने राजनीति के पंडितों को भी हैरान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विशेषज्ञ हैरान हैं और सोच रहे हैं कि चंद घंटों में ऐसा क्या हो गया कि फडणवीस राज्य के सीएम बन गए। इसके पीछे कहीं न कहीं अजित पवार का माइंडगेम जिम्मेदार है। देश की राजनीति में 91 में डेब्यू करने वाले अजित पवार हमेशा से एक दिन राज्य का सीएम बनने का सपना देखते आए हैं।

जब जताई डिप्टी सीएम बनने की इच्छा
साल 2009 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद ही उन्होंने राज्य के डिप्टी सीएम बनने की महत्वकांक्षा जाहिर की थी। लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को दे दिया गया। मगर दिसंबर 2010 में उनकी यह इच्छा नाटकीय ढंग से पूरी हुई और उन्हें पद सौंप दिया गया।












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