उद्धव ठाकरे ने भाजपा को याद दिलाया लोकसभा चुनाव का वादा, भाजपा बोली- सवाल ही नहीं उठता
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद प्रदेश में भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर आम राय बनती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ जहां देवेंद्र फडणवीस इस बात पर अड़े हैं कि प्रदेश में पांच साल भाजपा का मुख्यमंत्री होगा तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना है कि वह लोकसभभा चुनाव में जो तय हुआ था उससे हमे ना तो कम चाहिए और ना ही ज्यादा। ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस ने जो तय किया था उससे हमे ना तो कम चाहिए और ना ही ज्यादा।

आज निकल सकता है बीच का रास्ता
हालांकि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कुछ स्पष्ट बयान नहीं दिया है। वहीं देवेंद्र फडणवीस ने इस बात का इशारा दिया है कि उनकी पार्टी उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को देने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच चल रहे विवाद पर आज आम राय बन सकती है। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। गुरुवार को जब विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा हुई तो ठीक उसके बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नेन भाजपा को 50-50 का पॉवर फॉर्मूला याद दिलाया था।
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मुख्यमंत्री पद देने का सवाल ही
जानकारी के अनुसार शनिवार को उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों को साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी ढाई वर्ष तक मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहती है। लेकिन अगर भाजपा इसके लिए राजी नहीं होती है तो अन्य विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। लेकिन भाजपा के शीर्ष सूत्र का कहना है कि ठाकरे का यह प्रस्ताव पार्टी को कतई स्वीकार नहीं है। ऐसे में 50-50 का फॉर्मूला कतई स्वीकार नहीं है। यह तभी संभव था अगर भाजपा और शिवसेना दोनों ने बराबर सीटें जीती होती। लेकिन भाजपा को शिवसेना से दोगुनी सीटें मिली हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री का पद देने का सवाल ही नहीं उठता है।

क्या है सीटों का गणित
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने साफ किया है कि फडणवीस निसंदेह प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे, शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद देने का सवाल ही नहीं उठता है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा कुल 288 सीटें हैं, जिसमे भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली है, जबकि 2014 में पार्टी को 122 सीटों पर जरीत मिली थी। वहीं शिवसेना ने इस बार 56 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि 2014 में शिवसेना को 63 सीटों पर जीत मिली थी। इसके साथ ही चुनाव नतीजे सामने आने के बाद 17 निर्दलीय और बागी विधायकों ने भाजपा को अपना समर्थन दिया है, जिसके बाद भाजपा की संख्या 122 पहुंच गई है।












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