राज्यपाल के अधिक वक्त ना देने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में शिवसेना, कपिल सिब्बल हो सकते हैं वकील
मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। बीजेपी के बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता तो दिया था लेकिन इसके बाद उन्होंने सोमवार को उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका भी दे दिया। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए और अधिक वक्त देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्यपाल ने तीसरे बड़े दल एनसीपी से सरकार बनाने की इच्छा के बारे में पूछा था। वहीं, अब खबर आ रही है कि शिवसेना राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में शिवसेना
मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक, शिवसेना का कहना है कि राज्यपाल ने बीजेपी को तीन दिनों का वक्त दिया था, लेकिन उनको कम वक्त मिला। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना का पक्ष रख सकते हैं। हालांकि, सिब्बल की तरफ से इसपर कोई बयान नहीं आया है। यही बात शिवसेना नेता संजय राउत ने भी कही थी कि बीजेपी को राज्यपाल ने अधिक वक्त दिया था जबकि उनको कम वक्त मिला है।

राज्यपाल ने नहीं दिया था शिवसेना को अधिक वक्त
दरअसल, आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना नेताओं ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद आदित्य ठाकरे ने मीडिया के सामने आकर बताया कि उन्होंने सरकार बनाने के लिए दो दिनों का समय मांगा था और कहा था कि इसके लिए दूसरे दलों से बात हो रही है लेकिन राज्यपाल ने उनको समय देने से इनकार कर दिया। आदित्य ठाकरे ने कहा कि हम अभी भी सरकार बनाना चाहते हैं। आदित्य ने साथ ही ये भी कहा कि उनका दावा अभी खारिज नहीं हुआ है। लेकिन इसके बाद राज्यपाल के दफ्तर की तरफ से कहा गया कि शिवसेना ने उनको कोई समर्थन पत्र नहीं दिया है।

राज्यपाल ने दिया है एनसीपी को शाम 8:30 बजे तक का वक्त
बता दें कि शिवसेना के पास 56 विधायक हैं। वहीं, इसके बाद राज्यपाल की तरफ से इसके बाद सरकार बनाने के लिए एनसीपी को बुलाया गया। अब एनसीपी को न्योता मिलने के बाद से बैठकों का दौर जारी है। वहीं, सरकार बनाने में देरी पर एनसीपी अजीत पवार का कहना था कि हम दोनों (एनसीपी-कांग्रेस) साथ मिलकर चुनाव लड़े थे। अजीत पवार ने कहा कि कल हम कांग्रेस की तरफ से जवाब का इंतजार करते रहे, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला। हम अकेले कोई फैसला नहीं ले सकते हैं। एनसीपी नेता ने कहा कि हम लोग के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है, हम साथ चुनाव लड़े थे और साथ हैं।












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