शिवसेना ने मोहम्मद गोरी से की भाजपा की तुलना, कहा- हमारी पीठ पर वार हो रहा

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच शिवसेना ने बेहद कड़े शब्दों में भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखे गए लेख में मोहम्मद गोरी से भाजपा की तुलना की गई है। इशारे में भाजपा को पीठ में खंजर घोंपने वाली और अहसानफरामोशी करने वाली पार्टी कहा गया है। लेख में कहा गया है कि जिस भाजपा को कोई साथ रखना और बात करना पसंद नहीं करता था उसको शिवसेना ने ही मदद की थी लेकिन वो ये भूल रहे हैं। एनडीए से निकाले जाने को लेकर शिवसेना ने भाजपा पर हमला बोला है।

'महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपनेवालों को छोड़ा नहीं जाएगा'

'महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपनेवालों को छोड़ा नहीं जाएगा'

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा गया है, इतिहासकारों के मुताबिक मोहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच छोटे-बड़े 18 युद्ध हुए। उसमें से 17 युद्ध चौहान ने जीते और हर बार मोहम्मद गोरी को जीवनदान देकर छोड़ दिया। आखिरी लड़ाई में गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। बार-बार मिले जीवनदान को गोरी भूल गया। उसने पृथ्वीराज चौहान को गिरफ्तार कर प्रताड़नाएं दीं। महाराष्ट्र में भी ऐसे विश्वासघाती प्रवृत्ति को हमने कई बार जीवनदान दिया। आज यही प्रवृत्ति शिवसेना की पीठ पर वार कर रही है लेकिन महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपनेवालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

 एनडीए से बाहर किए जाने पर दिखाया गुस्सा

एनडीए से बाहर किए जाने पर दिखाया गुस्सा

शिवसेना को एनडीए से निकालने पर लेख में लिखा गया है, मोदी मंत्रिमंडल के किसी प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि कांग्रेस और एनसीपी से शिवसेना के संबंध जुड़ने के कारण शिवसेना एनडीए से बाहर निकाल दिया गया है। बीजेपी के बगल में भी कोई खड़ा नहीं होना चाहता था। हिंदुत्व जैसे शब्दों को देश की राजनीति में कोई पूछता भी नहीं था तब और उसके पहले जनसंघ के दीये में शिवसेना ने तेल डाला है। एनडीए के जन्म और प्रसव पीड़ा को शिवसेना ने अनुभव किया है। साफ है यात्रा में जल्दबाजी दुर्घटना को निमंत्रण देती है।

शिवसेना लगातार हमलावर

शिवसेना लगातार हमलावर

शिवसेना भाजपा पर लगातार हमलावर है। भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के बाद शिवसेना सीएम पद को लेकर अलग रास्ता चुन चुकी है। एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को लेकर उसकी बातचीत भी चल रही है। ऐसे में वो लगातार भाजपा पर निशाना साध रही है।

बता दें, महाराष्ट्र में फिलहाल राष्ट्रपति शासन है। 12 दिसंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। जिसमें बीजेपी के 105 और शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं। कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली। बहुमत के लिए यहां 145 सीटों की जरूरत है, ऐसे में साफ है कि कोई एक पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी। भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था और दोनों दलों की सीटें भी बहुमत के आंकड़े से ज्यादा हैं लेकिन नतीजे आने के बाद शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर अड़ी गई, वहीं भाजपा इस पर तैयार नहीं हुई। इसी को लेकर नई सरकार का रास्ता साफ नहीं हो पाया। इसके बाद एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है।

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