महाराष्‍ट्र पॉलिटिक्‍स: पीएम मोदी के कहने पर सीएम फडणवीस ने दिया इस्‍तीफा!

नई दिल्‍ली। महाराष्‍ट्र का सियासी पारा मंगलवार को पूरा दिन ऊपर-नीचे होता रहा और मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्‍तीफे के साथ ड्रामे का अंत हुआ। सूत्रों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मीटिंग हुई थी। सूत्रों का कहना है इसी मीटिंग के कुछ ही घंटों के बाद फडणवीस ने अपना इस्‍तीफा सौंप दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सीएम फडणवीस को बुधवार को फ्लोर टेस्‍ट के जरिए अपना बहुमत साबित करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद मोदी-शाह मीटिंग

सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद मोदी-शाह मीटिंग

केंद्र की सत्‍ताधारी बीजेपी के दोनों टॉप लीडर्स ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ विकल्‍पों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस पर चर्चा की कि फडणवीस को अब सीएम रहना चाहिए या फिर उन्‍हें अपने पद से इस्‍तीफा दे देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस को आदेश दिया था कि वह तुरंत ही फ्लोर टेस्‍ट प्रक्रिया का पालन करें क्‍योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त की संभावना बढ़ जाएगी। यह लोकतंत्र की नैतिकता के खिलाफ है।

पीएम मोदी ने भिजवाया मैसेज

पीएम मोदी ने भिजवाया मैसेज

पीएम मोदी और अमित शाह संसद में उस समय संविधान दिवस से जुड़े एक कार्यक्रम में मौजूद थे। इसके तुरंत बाद नेताओं ने मु़लाकात की और फैसले पर चर्चा की। सूत्रों ने दावा किया है कि इसी मीटिंग के बाद फडणवीस को एक संदेश भिजवाया गया था। मंगलवार दोपहर 3:30 मिनट पर फडणवीस ने अपने इस्‍तीफे का ऐलान कर दिया। फडणवीस और एनसीपी के अजित पवार ने शनिवार की सुबह पद की शपथ ली थी। सुबह आठ बजे से पहले ही दोनों नेताओं ने शपथ ले ली और इस पर पिछले तीन दिनों से इस पूरे घटनाक्रम पर जमकर विवाद हुआ।

बीजेपी के कदम पर जारी था विवाद

बीजेपी के कदम पर जारी था विवाद

शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय नहीं था मगर केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन को हटा लिया। शनिवार सुबह 5:47 मिनट पर राष्‍ट्रपति शासन उस समय हटाया गया जब पीएम मोदी ने एक असाधारण कानून का प्रयोग किया और बिना कैबिनेट से सलाह किए इसे मंजूरी दे दी। एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। बीजेपी का दावा है कि उसने राज्‍यपाल को 170 विधायकों के समर्थन वाली चिट्ठी सौंपी थी और इसके बाद ही सरकार बनी।

पवार ने किया था 54 विधायकों का दावा

पवार ने किया था 54 विधायकों का दावा

बीजेपी से हाथ मिलाने के बाद एनसीपी के अजित पवार ने भी 54 एनसीपी विधायकों के अपने साथ होने का दावा किया था। लेकिन एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने भतीजे अजित के दावों को खारिज कर दिया था। पिछले तीन दिनों में एनसीपी के जो विधायक गायब थे वो सभी वापस आ गए और उन्‍होंने अजित पवार पर उन्‍हें भ्रमित करने का आरोप लगाया।

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