शिवसेना के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले शरद पवार- ये सरकार गिरेगी, हम आएंगे सत्ता में

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शनिवार सुबह बदले सियासी घटनाक्रम को लेकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि उनके भतीजे अजित पवार का भाजपा के साथ जाने का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। जो भी विधायक भाजपा को समर्थन देने उनके साथ गए उनके खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई के लिए सिफारिश करेंगे। अजित पवार नेता विधायक दल के पद से भी हटाया जाएगा और बैठक में नया नेता चुना जाएगा। पवार ने कहा कि कुछ विधायकों को अजित धोखे से राजभवन ले गए। हम भाजपा के खिलाफ थे और अजित ने जो किया हम उसका समर्थन नहीं कर सकते हैं। एनसीपी नेता ने शिवसेना के साथ साझा प्रेस में ये बात कही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी के शरद पवार और सुप्रिया सुले तो शिवसेना से उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे पहुंचे। कांग्रेस के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं हैं।

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    हम ही बनाएंगे सरकार पवार

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    पवार ने कहा कि सरकार बनाने के लिए हमारे पास जरूरी आंकड़ा था और तीनों दलों में इसको लेकर बातचीत भी चल रही थी। अजित के भाजपा को समर्थन देने का पता मुझे सुबह ही चला, जब शपथ ग्रहण हो गया। एनसीपी प्रमुख ने कहा कि जो विधायक अजित के साथ गए उन्होंने मुझसे बताया है कि उन्हें धोखे से ले जाया गया। ये सभी विधायक मेरे साथ हैं। देवेंद्र फडणवीस सदन में बहुमत नहीं साबित कर पाएंगे।जो खेल भाजपा ने किया है वो सदन में फेल हो जाएगा। सरकार हम ही बनाने जा रहे हैं, ये सरकार नहीं चलेगी।

    लोकतंत्र के नाम पर ठगी: ठाकरे

    लोकतंत्र के नाम पर ठगी: ठाकरे

    शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा महाराष्ट्र में गंदा खेल कर रही है, जिस तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया गया उसे देश देख रहा है। शिवसेना जो कहती है, सबके सामने कहती है लेकिन भाजपा ने धोखा दिया है। भाजपा ने बिहार और हरियाणा में लोकतंत्र का मजाक उड़ाया और महाराष्ट्र में भी।

    महाराष्ट्र में शनिवार सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और एनसीपी विधायक अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। अजित ने एनसीपी के भाजपा को समर्थन की बात कही है लेकिन पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि बीजेपी को समर्थन देकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का फैसला पार्टी का नहीं बल्कि उनके भतीजे अजित पवार का निजी फैसला है।

    चुनाव में एक दल को नहीं मिला था बहुमत

    चुनाव में एक दल को नहीं मिला था बहुमत

    महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। जिसमें बीजेपी के 105 और शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं। कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली। बहुमत के लिए यहां 145 सीटों की जरूरत है, ऐसे में साफ है कि कोई एक पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी। भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था और दोनों दलों की सीटें भी बहुमत के आंकड़े से ज्यादा हैं लेकिन नतीजे आने के बाद शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर अड़ी गई, वहीं भाजपा इस पर तैयार नहीं हुई। इसी को लेकर नई सरकार का रास्ता साफ नहीं हो पाया। महाराष्ट्र में 12 दिसंबर को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसके बाद एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को बातचीत चल रही थी। इसी बीच शनिवार सुबह अचानक ही अजित पवार ने समर्थन की बात कही और देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली।

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