महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण बनाम ओबीसी कार्ड, शिंदे सरकार की क्यों बढ़ा रहा है टेंशन?
महाराष्ट्र में जिस तरह से मराठा आंदोलनकारी और राज्य के कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल आमने-सामने होने की कोशिश में हैं, वह राज्य की शांति के लिए शुभ संकेत नहीं है।
अब मराठा कोटा आंदोलन की मांग कर रहे मनोज जारांगे पाटिल ने भुजबल पर सीधा हमला बोलना शुरू कर दिया है। वह राज्य सरकार को बार-बार 24 दिसंबर तक मराठा को ओबीसी आरक्षण का लाभ देने का अल्टीमेटम दे रहे हैं।

मनोज जारांगे के निशाने पर आए भुजबल
बुधवार को उन्होंने बिना नाम लिए सीधे भुजबल को निशाने पर लिया है। नासिक में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि आप कहां सब्जियां बेचा करते थे, आपने किसका बंगला हड़प लिया, मुंबई में आपने क्या-क्या किया, किस सिनेमा और ड्रामा में आपने ऐक्टिंग की....'
दरअसल, जारांगे उस घोटाले का इशारा कर रहे थे, जिसमें महाराष्ट्र एंटी-करप्शन ब्यूरो ने 2016 में भुजबल को आरोपी बनाया था। जारांगे ने कहा कि लोगों का पैसा लूटा गया, 'इसलिए आपने (भुजबल) जेल की भी सजा काटी...'
'हमें आरक्षण मिलेगा और इसको लेकर कोई शक नहीं है'
उन्होंने यहां तक दावा किया कि 'हमें आरक्षण मिलेगा और इसको लेकर कोई शक नहीं है। हमें 50 फीसदी कोटे के दायरे में ही आरक्षण मिलेगा। मेरी ताजा जानकारी के मुताबिक हमारे कुनबी स्टैटस को लेकर 32 लाख रिकॉर्ड मिल चुके हैं। अगर इसे गुना करें तो 1.50 करोड़ से ज्यादा मराठाओं को कुनबी जाति का सर्टिफिकेट मिल जाएगा। अगर ये आरक्षण हमें 70 साल पहले मिल जाता तो मराठा समाज आज अप्रत्याशित प्रगति प्राप्त कर चुका होता।'
इससे पहले मंगलवार को जारांगे धमकी भरे अंदाज में यहां तक संकेत दे चुके हैं कि अगर उनके समुदाय की मांग नहीं मानी गई तो अबकी बार उनका आंदोलन मुंबई तक पहुंच सकता है।
मंत्री ही ओबीसी कोटे में फेरबदल का कर रहे हैं विरोध
दिक्कत ये है कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार (बीजेपी, शिवसेना, एनसीपी-अजित पवार गुट) में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ही ओबीसी आरक्षण के मौजूदा कोटे में किसी और जाति को शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। वह इसके खिलाफ जालना में एक सभा भी आयोजित कर चुके हैं, जहां उनपर कुछ बहुत ही आक्रामक टिप्पणियां करने के आरोप लगे हैं।
टकराव तक की धमकी दे चुके हैं भजबल
भुजबल का कहना है कि 'हम मराठा आरक्षण का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन ओबीसी कोटा में किसी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।' रिपोर्ट के मुताबिक भुजबल कह चुके हैं कि राज्य में मराठों को आरक्षण देने से एक ओर मराठा और दूसरी ओर ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मुसलमानों के बीच टकराव होगा।
इस तरह के बयानों की वजह से एकनाथ शिंदे सरकार के मंत्री और अजित पवार गुट के एनसीपी नेता पर मराठा और ओबीसी समुदाय के बीच तनाव बढ़ाने के आरोप लग रहे हैं। इसको लेकर एनसीपी की अंदरुनी राजनीति भी सामने आ रही है।
मसलन, शरद पवार गुट के एमएलए रोहित पवार ने उनपर आरोप लगाया है कि वह बीजेपी के इशारे पर इस मुद्दे पर विवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, भुजबल का कहना है कि वह 35 साल से इस मुद्दे को उठा रहे हैं।
शिंदे सरकार की क्यों बढ़ा रहा है टेंशन?
कुल मिलाकर दोनों पक्षों की ओर से तनातनी बढ़ती नजर आ रही है, जो कि महाराष्ट्र के कानून और व्यवस्था के लिए सही नहीं है। खासकर राज्य सरकार के एक मंत्री का इसका हिस्सा बनना बहुत ही गंभीर मामला है और आने वाले समय में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार के लिए यह परेशानी की वजह बन सकता है।
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