शिवसेना नहीं अब एनसीपी की सरकार को कांग्रेस से समर्थन मांग रही है शरद पवार की पार्टी

मुंबई। महाराष्ट्र में चुनाव के नतीजों की घोषणा हुए तकरीबन तीन हफ्ते का समय गुजर चुका है, बावजूद इसके प्रदेश में नई सरकार का रास्ता अभी तक साफ नहीं हो सका है। प्रदेश में सरकार के गठन के लिए चल रही कवायद में एनसीपी मुख्य केंद्र में रही, यहां तक कि एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने शिवसेना के चीफ उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। बावजूद इसके प्रदेश में वैकल्पिक सरकार की तस्वीर साफ होती नहीं दिख रही, इसी वजह से राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया है। दरअसल कांग्रेस शिवसेना को समर्थन देने के पक्ष में नहीं है, यही वजह है कि अब एनसीपी ने अपनी रणनीति को बदल दिया है।

नंबर जुटाने में पीछे रह गई शिवसेना

नंबर जुटाने में पीछे रह गई शिवसेना

दरअसल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी, लेकिन संख्या बल नहीं होने की वजह से भाजपा सरकार बनाने से पीछे ह गई। भाजपा को प्रदेश में 105 सीटों पर जीत मिली थी और प्रदेश की कुल 288 विधानसभा सीटों वाले सदन में पूर्ण बहुमत हासिल करने से 40 सीट दूर रह गई। वहीं शिवसेना को भी प्रदेश में सरकार बनाने के लिए 24 घंटे का समय मिला लेकिन शिवसेना नंबर जुटाने में पीछे रह गई। जिसके बाद गेंद अब एनसीपी के पाले में है।

एनसीपी को मिला है न्योता

एनसीपी को मिला है न्योता

शिवसेना के बाद एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता मिला है और एनसीपी के नेताओं को इस बात का भरोसा है कि वह कांग्रेस को समर्थन देने के लिए मना लेंगी। एनसीपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि दक्षिण भारत के नेता शिवसेना को समर्थन देने के खिलाफ हैं और वह हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि शिवसेना-एनसीपी की सरकार ना बने। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से आने वाले समय में दक्षिण भारत और उत्तर भारत में पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एनसीपी को कांग्रेस की हरी झंडी का इंतजार

एनसीपी को कांग्रेस की हरी झंडी का इंतजार

एनसीपी नेता ने बताया कि इन सभी सवालों के बीच शरद पवार ने उद्धव ठाकरे से 48 घंटे अतिरिक्त समय की मांग की थी। यही नहीं पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी फोन पर बात की थी। सोमवार को शरद पवार ने साफ किया था कि उनका फैसला पार्टी के सहयोगी दल के फैसले के अनुरूप ही होगा। हमने शिवसेना के सामने किसी भी तरह की कोई शर्त नहीं रखी है। बता दें कि एनसीपी ने दो दौर की बैठक की थी, लेकिन कांग्रेस के साथ बीच का रास्ता नहीं निकल सका।

शिवसेना को समर्थन देने के पक्ष में नहीं कांग्रेस

शिवसेना को समर्थन देने के पक्ष में नहीं कांग्रेस

एनसीपी नेता ने बताया कि कांग्रेस शिवसेना को उसकी कट्टर हिंदुत्व छवि की वजह से अपना समर्थन नहीं देना चाहती है। एनसीपी कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत 145 विधायकों का आंकड़ा नहीं है, लिहाजा एनसीपी-कांग्रेस सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकती है, उसे शिवसेना का समर्थन चाहिए होगा। ऐसी स्थिति में एनसीपी कांग्रेस को इस बात के लिए मनाने की कोशिश करेगी कि शिवसेना अब हमारा समर्थन कर रही है। उस वक्त मुमकिन है कि कांग्रेस गैर भाजपा सरकार का समर्थन कर सकती है।

सीएम की कुर्सी पर हो सकती है चर्चा

सीएम की कुर्सी पर हो सकती है चर्चा

जहां तक मुख्यमंत्री पद की बात है एनसीपी नेता का कहना है कि सबसे पहले हमे 145 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपना है। उसके बाद प्रदेश का मुख्यमंत्री किसका होगा, उसपर चर्चा की जा सकती है। इस तरह के भी उदाहरण हैं जब निर्दलीय विधायक भी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। मधु कोड़ा को झारखंड में 2006 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था, वह उस वक्त निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीते थे।

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