Maharashtra Government Crisis, एकनाथ शिंदे पहले भी इन मौकों पर दिखा चुके हैं विरोधी तेवर
Maharashtra Government Crisis, एकनाथ शिंदे पहले भी इन मौकों पर दिखा चुके हैं विरोधी तेवर
मुंबई, 21 जून: महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के मंत्री एकनाथ शिंदे 20 से अधिक विधायकों को लेकर उड़ चुके है। कभी उद्धव सरकार की ढ़ाल रहे शिंदे बड़ी संख्या में विधायकों को लेकर नॉट रिचेबल हो चुके हैं और वो सीएम उद्धव ठाकरे तक का फोन नहीं उठा रहे। जिसके बाद महाराष्ट्र की तीन पहियों की महाअघाड़ी सरकार का गिरना तय माना जा रहा है। हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब शिंदे ने पार्टी से बगावती तेवर दिखाए हैं। आइए जानते हैं वो मौके जब शिंदे ने खुलकर बगावत की ?

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सीएम की कुर्सी से चूक गए थे शिंदे
59 साल के एकनाथ शिंदे शिवसेना के कद्दावर नेता जो महाराष्ट्र सरकार में नगर विकास मंत्री हैं, जब 2019 में शिंदे को उद्धव ठाकरे ने विधायक दल का नेता बना दिया तो माना जा रहा था तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन शिंदे के अरमानों पर पानी फिर गया यहां तक कि डिप्टी सीएम का पद भी नहीं मिला जिसका कारण उनको हताशा हुई थी। एनसीपी प्रमुख शरद पवार उद्धव ठाकर को ही सीएम बनाना चाहते थे और शिंदे सीएम की कुर्सी से चंद कदमों की दूरी तक पहुंचकर चूक गए।
शिवसेना की विरोधी विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन भी नहीं आया था रास
सरकार का गठन तो हो गया था लेकिन राजठाकरे के समय के शिवसैनिक शिंदे को विरोधी विचारधारा वाली पार्टियों से शिवसेना का गठबंधन कभी भी बर्दास्त नहीं हुआ। आए दिन उनके बगावती सुर अप्रत्यक्ष रूप से सामने आते रहे।
एनसीपी के पास महत्वपूर्ण मंत्रालय जाने पर भी हुए थे हताश
महाअघाड़ी सरकार के गठन के समय महाराष्ट्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रायल जब एनसीपी के खाते में गए ये भी बात शिंदे को रास नहीं आई थी और उन्होंने शिवसेना प्रमुख से नाराजगी जताई थी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जब बीमार हुए थे तब भी कनाथ शिंदे कहीं नजर नहीं आए थे। इस दौराना संजय राउत का शिवसेना और सरकार में महत्वपूर्ण मुद्दों पर दखल उन्हें बर्दास्त नहीं हो रहा था। वहीं भाजपा नेताओं से उनकी नजदीकियों के कारण वो हमेशा शक की नजर से देखें जाते रहे।
मुस्लिमों को आरक्षण देने के मुद्दें पर बोली थी ये बात
महाराष्ट्र में मुस्लिमों को शिक्षा और रोजगार में पांच फीसदी आरक्षण देने की बात जब एनसीपी नेता और अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने विधान परिषद में कहीं थी और कहा था कि मुसमानों को आरक्षण देने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल में लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अध्यादेश जारी होगा। तब शिंदे वो हिंदूवादी शिव सैनिक नेता और शहरी विकास मंत्री थे जिन्होंने कहा था अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना प्रमुख से इस पर विरोध भी जाताया था।
समृद्धि राजमार्ग की खिलाफत पर शिवसेना का नहीं दिया साथ, पूरा करवाया काम
शिवसेना शुरू में समृद्धि राजमार्ग की खिलाफत कर रही थी लेकिन एकनाथ शिंदे ने इस परियोजना पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की। इतना ही नहीं मंत्री बनते ही उन्होंने बहुत कम समय में राजमार्ग का काम पूरा किया। हालांकि इस काम का श्रेय उनको नहीं मिला।
शिंदे को इस वजह से मिला विधायकों का साथ
शिंदे को उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का बढ़ता कद बर्दास्त नहीं था और उनका सभी विभागों में दखल बढ़ गया था जो उन्हें बर्दास्त नहीं हो रहा था। इसके अलावा उन्हें बराबर शिकायत रही कि उनके विधायकों का काम करने के लिए फंड नहीं मिल रहे जिसके कारण वो काम नहीं करवा पा रहे । वो शिवसेना के नाराज विधायक शिंदे के साथ हैं।
भाजपा के केन्दीय मंत्री राणे ने एक साल पहले ही दिए थे ये संकेत
केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नारायण राणे ने अगस्त 2021 में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान भाषण में कहा था कि एकनाथ शिंदे केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले ही मंत्री बचे हैं। वे शिवसेना में ऊब गए हैं। वे जल्द हमारे साथ जुड़ेंगे। हालांकि तब शिंदे ने इस बात को गलत बताया था लेकिन तब भी उनकी बगावत को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थी।
शिंदे ने कहा - हम बालासाहेब के पक्के शिवसैनिक कभी धोखा नहीं देंगे
बागी शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने ट्वीट में कहा है कि 'हम बालासाहेब के पक्के शिवसैनिक हैं...बालासाहेब ने हमें हिंदुत्व सिखाया है..बालासाहेब के विचारों और धर्मवीर आनंद दीघे साहब की शिक्षाओं पर चलते हुए हमने सत्ता के लिए कभी धोखा नहीं दिया और न कभी धोखा देंगे।' उधर बागी शिंदे पर ऐक्शन लेते हुए शिवसेना ने उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक दल के नेता पद से हटा दिया है।












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