Maharana Pratap jayanti: महाराणा प्रताप के पास था 81 किलो का भाला और चेतक जैसा वफादार घोड़ा

Maharana Pratap jayanti: हल्दीघाटी युद्द के दौरान महाराणा प्रताप ने घास की रोटी बनाकर अपने घरवालों को खिलाई थी लेकिन मुगलों के आगे घुटने नहीं टेके।

Maharana Pratap jayanti:

Maharana Pratap jayanti: आज पूरा देश अपने वीर महाराणा प्रताप का जन्मोत्सव मना रहा है। महाराणा प्रपाप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ में हुआ था। राणा उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंताबाई के पुत्र राणा प्रताप के बचपन का नाम 'कीका' था, जिसका अर्थ होता है बेटा। वो अपने माता-पिता की ज्येष्ठ संतान थे।

जानिए कैसे राणा प्रताप महाराणा बने

लेकिन राणा उदय सिंह की 20 से अधिक रानी थीं, जिसमें से वो रानी धीरबाई भटियाणी से सबसे ज्यादा प्रेम करते थे और इसी वजह से उन्होंने अपनी वसीयत में उनके बेटे जगमाल सिंह को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था लेकिन उनकी मृत्यु के बाद जब राजगद्दी पर बैठने की बात आई तो राणा उदय सिंह के मंत्रियों ने इस फैसले को मानने से इंकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि राजगद्दी पर बैठने योग्य राणा प्रताप ही हैं जो राजा के सबसे बड़े बेटे और हर लिहाज से जगमाल से बेहतर थे और इस तरह से राणा प्रताप महाराणा बने थे।

चेतक घोड़े बिना अधूरा है महाराणा प्रताप का वर्णन

इतिहास के पन्ने राणा प्रताप की वीरता से भरे पड़े हैं। उनका जिक्र जब भी होता है, तो चेतक घोड़े का नाम जरूर आता है। कहा जाता है कि अपने राजा की जान बचाने के लिए वो 26 फीट लंबे नाले के ऊपर से कूद गया था। आज भी हल्दीघाटी में उसकी समाधी बनी है।

राणा प्रताप का भाला 81 किलो का

महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थी, कहते हैं उनका भाला 81 किलो का और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उन्होंने युद्द के दौरान घास की रोटी बनाकर अपने घरवालों को खिलाई थी लेकिन मुगलों के आगे घुटने नहीं टेके।

हल्दीघाटी का युद्ध

महाराणा प्रताप और अकबर की लड़ाई के किस्से काफी मशहूर हैं। लाख जतन और सारे हथकंडे अपनाने के बाद भी अकबर मेवाड़ को कभी जीत नहीं पाया था। हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था, जिसमें ना तो अकबर जीता था और ना ही राणा प्रताप हारे थे।

अकबर ने मेवाड़ भेजा था शोक संदेश

कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि महाराण के निधन के बाद अकबर ने अपना शोक संदेश मेवाड़ भिजवाया था जिसमें उन्होंने दुख प्रकट किया था कि मुझे आजीवन इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं कभी भी महाराणा को हरा नहीं पाया, वो वीर योद्धा थे, मैं उन्हें सलाम करता हूं।

चेतक की महिमा पर कवि श्याम नारायण पांडे ने बहुत ही रोचक कविता लिखी है, जो कि बहुत लोकप्रिय भी है

  • रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े से¸ पड़ गया हवा को पाला था।
  • गिरता न कभी चेतक-तन पर¸ राणा प्रताप का कोड़ा था।
  • वह दोड़ रहा अरि-मस्तक पर¸ या आसमान पर घोड़ा था।।
  • जो तनिक हवा से बाग हिली¸ लेकर सवार उड़ जाता था।
  • राणा की पुतली फिरी नहीं¸ तब तक चेतक मुड़ जाता था।। -
  • है यहीं रहा, अब यहां नहीं,वह वहीं रहा था यहां नहीं।
  • थी जगह न कोई जहाँ नहीं, किस अरि - मस्तक पर कहाँ नहीं।
  • कौशल दिखलाया चालों में,उड़ गया भयानक भालों में।
  • निर्भीक गया वह ढालों में,सरपट दौड़ा करबालों में।
  • बढ़ते नद सा वह लहर गया,वह गया गया फिर ठहर गया।
  • विकराल वज्रमय बादल सा, अरि की सेना पर घहर गया।
  • भाला गिर गया, गिरा निशंग,हय टापों से खन गया अंग।
  • बैरी समाज रह गया दंग, घोड़े का ऐसा देख रंग।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+