महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वंशज की लंबी है फैन फॉलोइंग, बड़े-बड़े लोग लगा चुके हैं करोड़ों की बोली
किस्से-कहानियों में आपने महाराणा प्रताप के मशहूर घोड़े चेतक के बारे में सुना होगा। चेतक ने अपने मालिक महाराणा प्रताप को युद्ध की रणभूमि से सुरक्षित निकालने के बाद वीरगति को प्राप्त हो गया था। आज उस घोड़े की वंशज महाराष्ट्र के मशहूर घोड़ा मेला में धूम मचा रहा है।

नई दिल्ली। किस्से-कहानियों में आपने महाराणा प्रताप के मशहूर घोड़े चेतक के बारे में सुना होगा। चेतक ने अपने मालिक महाराणा प्रताप को युद्ध की रणभूमि से सुरक्षित निकालने के बाद वीरगति को प्राप्त हो गया था। आज उस घोड़े की वंशज महाराष्ट्र के मशहूर घोड़ा मेला में धूम मचा रहा है। ये घोड़ी बाकी सभी नस्लों के घोड़ों के मुकाबले आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

चेतक की वंशज है ये घोड़ी
महाराष्ट्र के सारंगखेड़ा में घोड़ों का मेला चल रहा है जिसमें चेतक घोड़े की वंश 'पद्ना' मुख्य आकर्षण बना हुआ है। इस घोड़ी की कीमत इतनी है कि सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। इस सफेद घोड़ी की कीमत पूरे 2 करोड़ रुपये है। इस घोड़ी को कई लोग खरीदना चाहते हैं, लेकिन मालिक इसे बेचने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

कीमत सुन दंग रह गए थे मु्ख्यमंत्री
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तो इसकी कीमत सुनकर ही दंग रह गए थे। मालिक चंदना ने इस घोड़ी को तब खरीदा था जब ये केवल 4 महीने की थी। इस घोड़ी की रोज की डाइट भी कोई ऐसी-वैसी नहीं, बल्कि पूरी पौष्टिक है। ये घोड़ी रोज बादाम, किशमिश खाता है और पीने में दूध-मिनरल वॉटर होता है।

साहस और वीरता का परिचय था चेतक
महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक इतिहास का सबसे मशहूर घोड़ा है। हल्दी घाटी युद्ध के दौरान चेतक ने अपनी वीरता का परिचय दिया था। चेतक इतना पराक्रमी था कि मानसिंह के हाथी के सिर पर उसने अपने पांव रख दिए थे। युद्ध में घायल हुए राजा महाराणा प्रताप को सुरक्षित रणभूमि से बाहर निकाला था। इतना ही नहीं, महाराणा प्रताप को अपने कंधे पर डालकर 26 फीट का नाला लांघ लिया था।

कवि श्याम नारायण पाण्डेय ने लिखी थी कविता
चेतक की वीरता पर कवि श्याम नारायण पाण्डेय ने एक कविता भी लिखी थी, जिसकी पंक्तियां इस प्रकार है-
रण बीच चौकड़ी भर-भर कर
चेतक बन गया निराला था
राणाप्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा का पाला था
जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था
गिरता न कभी चेतक तन पर
राणाप्रताप का कोड़ा था
वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर
वह आसमान का घोड़ा था












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