Mahakumbh 2025: प्रयागराज में होगी VHP मार्गदर्शक मंडल की बैठक, काशी-मथुरा समेत किन 6 एजेंडों पर चर्चा संभव?
Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ में शुक्रवार से विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल की बैठक होने जा रही है। यहां इस वक्त देशभर के संत और साधु-महात्मा जुटे हुए हैं और इस मौके पर वीएचपी की इस बैठक की अहमियत बहुत बढ़ गई है। दिल्ली और लखनऊ दोनों जगहों पर भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकारें हैं, ऐसे में विश्व के सबसे बड़े हिंदू समागम में इस बैठक में जो भी चर्चा होगी, वह आने वाले दिनों में निश्चित तौर पर देश की राजनीति पर भी असर डाल सकती है।
वीएचपी ने खुद बताया है कि संतों के साथ बैठक में काशी और मथुरा के अलावा प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजन) एक्ट,1991 प्रमुख एजेंडा रह सकता है। इसके अलावा कुछ और ऐसे मुद्दे हैं, जिसपर संतों के साथ विचार-विमर्श किया जा सकता है।

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में भविष्य का एजेंडा सेट करने की तैयारी!
इसके बारे में वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने टीओआई को बताया है,'वर्तमान परिस्थितियों में ये दोनों मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। वीएचपी इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और भविष्य के लिए रणनीतियां तय करेगी।' उनका कहना है कि विहिप अपने विचारों से बंधा है और संतों का जो भी निर्देश होगा और हिंदुओं की जो भी भावना होगी, यह उसी के अनुसार कार्य करेगा।
Mahakumbh 2025: प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजन) एक्ट,1991 की संवैधानिक वैद्यता पर सुप्रीम कोर्ट में होनी है सुनवाई
जानकारी के मुताबिक वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर और मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर पूर्ण दावे को लेकर मार्गदर्शक मंडल में एक विस्तृत प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है। वीएचपी की इस बैठक की अहमियत इस वजह से बढ़ गई है कि मथुरा की शाही ईदगाह कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजन) एक्ट,1991 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र के जवाब देने के अधिकार पर रोक लगाने की मांग की है।
कमेटी का आरोप है कि केंद्र जवाब देने में जानबूझकर देरी कर रहा है, ताकि याचिकाओं पर सुनवाई में देरी हो। 18 सितंबर, 1991 को कांग्रेस सरकार की ओर से संसद से पारित इस कानून के लागू होने की वजह से 15 अगस्त, 1947 के बाद से पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र को उसी रूप में संरक्षित रखना अनिवार्य है। शाही ईदगाह कमेटी का आरोप है कि केंद्र जवाब देने में इस वजह से देरी कर रहा है कि जो इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध कर रहे हैं, उसमें बाधा उत्पन्न हो।
इस कानून की संवैधानिक वैद्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 17 फरवरी, 2025 को सुनवाई करने वाला है। पिछले 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी अदालतों पर धार्मिक स्थलों पर नए दावों की सुनवाई, जारी मुकदमों पर प्रभावी या आखिरी आदेश देने पर भी अगले निर्देशों तक के लिए रोक लगा दी थी।
Mahakumbh 2025: मंदिरों को मुक्त कराने के अभियान को दी जा सकती है हवा
इसी कड़ी में देश के अन्य मंदिरों को मुक्त कराने का अभियान भी शामिल हो सकता है। खासकर यूपी के संभल में अदालती आदेश के बाद जिस तरह से जामा मस्जिद के आसपास हिंदू धर्म स्थलों का खुलासा हुआ है, उससे इसको लेकर पैदा हुई जनभावना पर भी वीएचपी की नजर है। इसी महीने की शुरुआत में विजयवाड़ा से 'मंदिरों को मुक्त'कराने के अभियान का भी आह्वान हुआ था। चर्चा है कि राम जन्मभूमि आंदोलन की तरह ही,इसे भी आगे बढ़ाने पर विचार हो रहा है।
हाल ही में वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी इसके बारे में इंडियन एक्सप्रेस से कहा था, 'मंदिरों को मुक्त कराना वीएचपी के एजेंडे में सबसे ऊपर है और हम इस पर देशव्यापी अभियान भी चला रहे हैं। लेकिन, मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भाग लेने वाले संत अपने मुद्दे और व्यापक हिंदू समाज से जुड़े मुद्दे भी उठाएंगे। हाल के दिनों में हिंदू समाज के सामने आए वर्तमान मुद्दों पर भी चर्चा की जा सकती है।'
Mahakumbh 2025: मार्गदर्शक मंडल की बैठक में वीएचपी के इन एजेंडों को भी मिल सकती है धार
इन दो महत्वपूर्ण मुद्दों के अलावा मार्गदर्शक मंडल की बैठक में जिन चार अहम एजेंडों पर चर्जा होने की संभावना है, उनमें मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराना भी वीएचपी के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडे में है। हाल के दिनों में इस मांग ने बहुत ज्यादा रफ्तार पकड़ी है और वीएचपी इसको लेकर संतों का आशीर्वाद चाह रहा है।
इसके अलावा तीन और विषय हैं, जिसको लेकर विश्व हिंदू परिषद मार्गदर्शक मंडल की बैठकों में संतों के साथ चर्चा कर सकता है, जिनमें हिंदुओं में घटते जन्म दर, 'घर वापसी' और 'लव जिहाद' जैसे विषय भी शामिल हैं। बीजेपी का वैचारिक अगुआ संगठन आरएसएस भी इन विषयों को उठाता रहा है और चुनावों में भी इन्हें मुद्दा बनाने की कोशिशें होती रही हैं।












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