IIT Baba: पढ़ाई में तेज, सीखने की ललक लेकिन परिवार के माहौल ने बदला, ऐसे गुजरा महाकुंभ वाले वायरल बाबा का बचपन
IIT Baba: हरियाणा में जन्मे और IIT बॉम्बे से पढ़े अभय सिंह, जिन्हें लोग 'IITian बाबा' के नाम से जानते हैं, का जीवन सफर बेहद अनोखा और चौंकाने वाला है। एयरोस्पेस इंजीनियर से संन्यासी बनने की उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी।
इस इंटरव्यू में उन्होंने अपनी जिंदगी के ऐसे पहलुओं को साझा किया, जिन्होंने उन्हें इंजीनियरिंग की चकाचौंध भरी दुनिया से हटाकर अध्यात्म की शांति भरी राह पर चलने के लिए प्रेरित किया।

अभय ने बताया कि उनका बचपन घरेलू तनावों और संघर्षों से भरा हुआ था, जो उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर छोड़ गया। उन्होंने एक बार कहा था कि घर के झगड़ों से बचने के लिए वह खुद को कमरे में बंद कर पढ़ाई में डूब जाते थे। यह संघर्ष और अकेलापन ही उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का कारण बना।
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गुरु पर विवाद और जूना अखाड़े से निष्कासन
अभय सिंह, जो अब 'IIT बाबा' के नाम से भी जाने जाते हैं, हाल ही में जूना अखाड़े के शिविर से निकाले गए। उन पर अपने गुरु महंत सोमेश्वर पुरी के खिलाफ अभद्र भाषा का उपयोग करने का आरोप है। एक वायरल वीडियो में उन्होंने अपने पिता को 'हिरण्यकश्यप' और अपने गुरु को 'पागल' कहा।
बचपन की कड़वाहट का मानसिक स्वस्थ पर असर!
अभय ने अपने बचपन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए बताया कि उनके घर में घरेलू हिंसा और माता-पिता के झगड़ों ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल से लौटने के बाद वह खुद को कमरे में बंद कर पढ़ाई में डूब जाते थे ताकि घर के माहौल से बच सकें। उन्होंने शादी न करने का फैसला भी इसी कारण लिया क्योंकि वह अपने बचपन के कड़वे अनुभवों को फिर से नहीं जीना चाहते थे।
बचपन के अनदेखे घाव
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, "बचपन के ट्रॉमा से दिमाग की संरचना प्रभावित होती है, खासकर ऐसे हिस्से जो भावनात्मक नियंत्रण और निर्णय लेने में मदद करते हैं, जैसे कि ऐमिगडाला, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और हिप्पोकैंपस। इन बदलावों से व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि PTSD, डिप्रेशन और एंग्जायटी।"
परवरिश का असर
मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका अहम होती है। साइकोलॉजिस्ट का कहना है, "सपोर्टिव पैरेंटिंग बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाती है। लेकिन अत्यधिक आलोचना, भावनात्मक उपेक्षा, या अवास्तविक अपेक्षाएं बच्चों के ट्रॉमा को बढ़ा सकती हैं।"
'IIT बाबा' के जीवन पर बचपन का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभय सिंह के बचपन में ही उनके ट्रॉमा को पहचाना और उसका समाधान किया गया होता, तो उनका जीवन शायद अलग होता। काउंसलिंग और थेरेपी के जरिए ट्रॉमा को समझकर उससे निपटा जा सकता है।
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