मैगी विवाद- अमिताभ-माधुरी हैं दोषी, तो धर्मेंद्र, अक्षय, हरभजन को भी जेल भेजो

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। मैगी विवाद पर बिहार के मुजफ्फरपुर की एक कोर्ट ने नेस्ले के दो अधिकारियों और मैगी का विज्ञापन करने वाले अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित और प्रीति जिंटा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और अगर जरूरत पड़े तो उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश दिये हैं। माना कि कोर्ट को भारत में सबसे ऊपर रखा गया है। लेकिन अगर अमिताभ-माधुरी वाकई में दोषी हैं, तो धर्मेंद्र, अक्षय कुमार, अजय देवगन, अक्षय कुमार को भी जेल भेज देना चाहिये, क्योंकि इन लोगों ने ऐसे ब्रांड का एंडॉर्समेंट किया है, जो मैगी से कहीं ज्यादा घातक हैं।

ये ब्रांड और कोई नहीं, बल्क‍ि बैग पाइपर, किंग फिशर, हेवर्ड्स, विल्स, रॉयल स्टैग, आदि हैं, जिनका मुख्य व्यापार शराब, बीयर व सिगरेट बेचने का है, लेकिन सरोगेट विज्ञापन के माध्यम से ये जमकर ब्रांड‍िंग करने में सफल हो जाते हैं। सरकार ने इनके ब्रांड एम्बेसडर से कभी नहीं पूछा कि जिस ब्रांड का प्रचार वे कर रहे हैं, क्या उनकी जांच कभी की है?

अमिताभ-माधुरी को फंसा कर सरकार खुद उलझा रही मैगी के नूडल्स

क्या मैगी की फैक्ट्री में जाते अमिताभ?

जरा सोचिए कि क्या कोई सेलिब्रेटी अब उस प्रोड्क्ट की क्वालिटी को जांचेगा जिसका वह ब्रांड एंबेसेडर बन रहा है? अगर सरकार की मानें तो हां! यानी अगर अमिताभ बच्चन को मैगी का विज्ञापन करना है, तो अपने किसी एक्सपर्ट को मैगी की फैक्ट्री भेज कर पता करें, कि उसमें कोई गड़बड़ तो नहीं है। और मान लीजिये अमिताभ ने एक्सपर्ट को भेज भी दिया, तो क्या कंपनी उस एक्सपर्ट को फैक्ट्री के अंदर घुसने देगी? नहीं, कतई नहीं! इस लिहाज से अगर अमिताभ और माधुरी दोषी हैं, तो शराब, सिगरेट के बड़े ब्रांडों के विज्ञापन करने वालों को पहले अंदर किया जाना चाहिये।

हम आपको बता दें कि बैगपाइपर और हेवर्ड 5000 सोडा से लेकर ब्लैंडर्स प्राइड के म्यूजिक एलबम के लिए भी कई बड़ी हस्तियों ने विज्ञापन किये। इनमें धर्मेंन्द्र, अक्षय कुमार, हरभजन सिंह, अजय देवगन समेत तमाम सेलेब्रिटीज़ शामिल हैं। सच पूछिए तो इन लोगों ने बैगपाइपर सोडा का नहीं बल्क‍ि बैगपाइपर की ब्रांडिंग की है, जो कि विस्की का नाम है। और तो और क्या आपने कभी किसी सुपर मार्केट में ब्लेंडर्स प्राइड म्यूजिक एल्बम देखा, या खरीदा? उम्मीद है, आपको मिला ही नहीं होगा, क्योंकि एल्बम का विज्ञापन तो महज एक बहाना है, असली प्रचार तो शराब का होता है।

विज्ञापन की दुनिया के जानकार कहते हैं कि हमारे यहां पर सब कुछ चलता है। जब मामला बेहद गंभीर रूप ले लेता है तो सबकी नींद खुल जाती है। मैगी को लेकर भी यह हुआ। क्या सरकारी अफसरों को मालूम नहीं कि शराब के बड़े ब्रांड्स को प्रमोट करने के लिए कंपनियों ने नए-नए तरीके अपना लिए हैं। क्या अब उन हस्तियों पर भी एक्शन होगा जिन्होंने कभी व्हस्की के ब्राड्स की आड़ में सोड़ा और दूसरे उत्पादों के विज्ञापन में भाग लिया। कम से कम अब तो यही लगता है।

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