184 रुपये के अंतर से 'मेड इन चाइना' को हरा सकता है भारत

नई दिल्ली। भारतीय बाजार इस वक्त भले ही चीनी सामनों से पटे पड़े हैं लेकिन जल्द ही स्थिति इसके उलट दिखाई पड़ सकती है। भारत का 'मेड इन इंडिया' चीन के 'मेड इन चाइना' को निकट भविष्य में मात दे सकता है। इसके सबके पीछे वजह और भारत और चीन में दी जाने वाली मजदूरी में 184 रुपये का अंतर।

184 रुपये के अंतर से 'मेड इन चाइना' को हरा सकता है भारत

दरअसल चीन में भारत की अपेक्षा मजदूरों को कहीं अधिक मजदूरी दी जाती है। दुनिया भर के बाजारों पर नजर रखने वाली संस्था यूरोमॉनिटर के मुताबिक चीन में 2016 में 3.60 डॉलर प्रति घंटा की दर से मजदूरी दी जाती थी। चीन में मजदूरी की दर में 2011 से अब तक लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस मंहगी मजदूरी के चलते चीन में बनने वाले सस्ते सामान अब धीरे-धीरे महंगे हो सकते है।

अगर इसके मुकाबले भारत की बात की जाए तो यहां चीन से लगभग 184 रुपये कम मजदूरी दी जाती है। जिस वजह से भारत जल्द ही चीन को निर्माण क्षेत्र में टक्कर देता दिख सकता है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में भी इस बारे में कुछ समय पहले चिंता जताई गई थी। चीनी अखबार ने कहा कि भारत भले ही अभी निर्यात के क्षेत्र में प्रारंभिक स्तर पर है लेकिन वो जल्द ही इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकते है।

इससे बचने के लिए चीन अपने उद्योंगों को कम मजदूरी दर वाले देशों में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है। साथ ही चीन अब निर्माण क्षेत्र के साथ सर्विस सेक्टर पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। क्योंकि चीन में विकास के साथ ही वहां की मजदूरी दर में भी इजाफा हो रहा है और जल्द ही उसे भारत जैसे देश निर्माण के क्षेत्र में टक्कर दे सकते हैं।

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