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राष्ट्रपति की पहली महिला ADC, जानिए कौन हैं LT Commander Yashasvi Solanki जो बनी शक्ति और साहस की मिशाल

President first woman ADC Yashasvi Solanki: कहते हैं, 'जहां सपनों को उड़ान मिलती है, वहीं इतिहास लिखा जाता है।' इस कहावत को सच कर दिखाया है हरियाणा की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने जिन्होंने राष्ट्रपति भवन की प्रतिष्ठित ADC टोली में बतौर पहली महिला अधिकारी जगह बनाकर एक नया इतिहास रच दिया है।

भारतीय लोकतंत्र की सबसे ऊंची संस्था, राष्ट्रपति भवन, अब एक नए युग की ओर बढ़ चला है जहां केवल परंपराएं नहीं, प्रगतिशील सोच भी गूंज रही है। यह नियुक्ति यशस्वी की निजी उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व की ओर उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। यह उस साहस और समर्पण की कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों की बेटियों को एक नई राह दिखाएगी।

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यशस्वी की उड़ान: खेलों से लेकर राष्ट्रपति भवन तक (Who is ADC Yashasvi Solanki)

27 वर्षीय यशस्वी मूल रूप से गुजरात के भरूच की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश जीवन हरियाणा के चरखी दादरी में बिताया। 2012 में उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत नौसेना में प्रवेश किया और लॉजिस्टिक्स ब्रांच में सेवा दे रही थीं। रक्षा उत्पादन विभाग में उनकी पोस्टिंग हैदराबाद में थी।

यशस्वी अपने परिवार में पहली सदस्य हैं जिन्होंने रक्षा क्षेत्र को करियर बनाया। 173 सेमी की ऊंचाई और दमदार शारीरिक फिटनेस वाली यशस्वी पूर्व में डिस्ट्रिक्ट लेवल की बैडमिंटन और वॉलीबॉल खिलाड़ी रही हैं। उनका पिछला कार्यस्थल था हैदराबाद स्थित नेवल आर्मामेंट (Defence Production), जहां वे एक तकनीकी अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। चयन के बाद उन्होंने एक माह का विशेष ओरिएंटेशन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अंततः 9 मई को राष्ट्रपति द्वारा उन्हें ADC की 'aiguillette' भेंट की गई - जो इस गौरवपूर्ण पद का प्रतीक है।

राष्ट्रपति की सोच से हुई इस क्रांति की शुरुआत

इस ऐतिहासिक पहल की प्रेरणा स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू थीं, जो न केवल देश की प्रथम नागरिक हैं, बल्कि सशस्त्र बलों की सुप्रीम कमांडर भी हैं। मेजर जनरल वी. परिदा, राष्ट्रपति के सैन्य सचिव, ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, "यह विचार माननीय राष्ट्रपति का था। वह महिला सशक्तिकरण की प्रबल पक्षधर हैं। उन्होंने स्वयं निर्णय लिया कि इस बार नौसेना से कोई महिला अधिकारी ADC बने।"

उसी क्रम में भारतीय नौसेना से तीन महिला अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इन सभी को राष्ट्रपति भवन में 15 दिनों के लिए रखा गया, जहां उनकी शारीरिक, मानसिक, और व्यवहारिक दक्षताओं की कठोर समीक्षा की गई। इनमें सबसे खास बात यह रही कि स्वयं राष्ट्रपति ने उनका साक्षात्कार लिया।

क्या होती है ADC की भूमिका? (What is the role of ADC)

भारत के राष्ट्रपति के पास पाँच एडीसी होते हैं - तीन थल सेना से, एक नौसेना और एक वायुसेना से। ADC का काम केवल प्रतीकात्मक नहीं होता; वे राष्ट्रपति और विभिन्न प्रशासनिक व सैन्य अंगों के बीच एक सेतु होते हैं। वे राष्ट्रपति के सभी कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं, मुलाक़ातों की पूर्व जानकारी देते हैं और सभी तरह के समन्वय का जिम्मा संभालते हैं।

ADC को राष्ट्रपति के कक्ष के ठीक पास एक ड्यूटी रूम आवंटित किया जाता है, जहां से वे 24 घंटे राष्ट्रपति के संपर्क में रहते हैं। कई बार उन्हें लगातार ड्यूटी पर रहना पड़ता है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल यशस्वी ने बताया, "हर मीटिंग से पहले हमें राष्ट्रपति को संक्षिप्त जानकारी देनी होती है, और वह कभी भी कुछ भी पूछ सकती हैं। इसलिए हमें हर समय हर पल से अपडेट रहना होता है।"

एक नई प्रेरणा: हर लड़की के लिए संदेश

लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी का यह ऐतिहासिक कदम आने वाली पीढ़ियों की बेटियों को यह विश्वास दिलाएगा कि राष्ट्रपति भवन से लेकर रणभूमि तक महिलाएं हर जगह नेतृत्व कर सकती हैं। यशस्वी की यह उड़ान साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं होती।

उनकी कहानी भारत की बदलती सोच को दर्शाती है जो एक ऐसा भारत, जहां अब महिलाएं न केवल बराबरी मांग रही हैं, बल्कि पुरुष प्रधान क्षेत्रों में भी सर्वोच्च पदों पर पहुंचकर नेतृत्व की परिभाषा भी बदल रही हैं।

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