Indore Loksabha में JAYS दिखाएगी दम, ये मुद्दे अहम, जानिए क्या है माहौल
Indore Loksabha: देश में लोकसभा चुनाव नजदीक है, जहां लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां का सिलसिला शुरू हो चुका है। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में लोकसभा चुनाव की हलचल अब दिखने लगी है, जहां लोकसभा चुनाव की हलचल होते ही राजनीतिक दल एक्टिव नजर आ रहे हैं। BJP और कांग्रेस के साथ-साथ अब क्षेत्रीय राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव में दम दिखाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश का एक ऐसा ही राजनीतिक दल जय आदिवासी युवा संगठन यानी जयस है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में जयस समर्थित प्रत्याशियों ने अपना दम दिखाया था तो वहीं लोकसभा चुनाव में जयस दम दिखाने के लिए तैयार नजर आ रही है। वन इंडिया हिंदी के वरिष्ठ संवाददाता नमन मटके ने जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा से बातचीत की है, जिसमें मुजाल्दा ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर जयस की खास रणनीति बताई है।

जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने बताया कि, लोकसभा चुनाव अब आने हैं, विधानसभा चुनाव में हमने हमारे स्वतंत्र उम्मीदवार उतारे थे। उन्होंने अच्छा परफॉर्मेंस किया है। मध्य प्रदेश में इकलौती सीट जयस के खाते में आई है। अब हम लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। संगठन की बैठक होनी है, जिसमें सभी लोग बैठकर इस पर निर्णय लेंगे मध्य प्रदेश में 6 आदिवासी रिजर्व सीट हैं। पूरे भारत में 47 रिजर्व सीटें हैं। मध्य प्रदेश में वह सीट जहां आदिवासियों का प्रभाव है, जैसे खंडवा-बुरहानपुर और इंदौर लोकसभा सीट पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है।
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मुजाल्दा ने बताया कि हमारी लड़ाई मुद्दों की लड़ाई है, जैसे हसदेव के जंगलों की कटाई हो रही है, इंदौर के आसपास भी आदिवासी गांव में डेवलपमेंट के नाम पर आदिवासियों की जमीन को अधिग्रहित किया जाना फैक्ट्रियां लगाना, हमारी लड़ाई जल, जंगल और जमीन की है।
मुजाल्दा बताते हैं कि, इंदौर स्टूडेंट हब है, आदिवासी इलाकों के विद्यार्थी यहां पर अध्यनरत हैं। वह कॉम्पिटेटिव एक्जाम की तैयारी करते हैं, लेकिन वैकेंसी जनरेट नहीं हो पा रही। सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है। एसटी-एससी के 1 लाख से ज्यादा बैक लॉग पद अभी भी रिक्त है, उसे सरकार के द्वारा भरने का काम नहीं किया जा रहा।
लोकेश मुजाल्दा ने बताया की, इंदौर लोकसभा सीट पर आदिवासी वोटर की संख्या लगभग 4 लाख के आसपास है। 4 लाख वोटर मायने रखते हैं, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता। सांसद उनके क्षेत्र तक पहुंचे भी नहीं होंगे। हम चाहते हैं, हमारे बीच के लोग जाएं, और दमदारी पेश करें। हम जितने के लिए लड़ रहे हैं, और जिस प्रकार का रिजल्ट विधानसभा चुनाव में देखने मिला, ठीक उसी तरह का रिजल्ट लोकसभा में देखने मिलेगा।
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